टीएमसी ने काउंटिंग सेंटर में बीजेपी‑संबंधित गाड़ियों के प्रवेश का आरोप, वीन्से फोगाट ने पूर्व डब्ल्यूएफआई प्रमुख पर उत्पीड़न का दावा
राज्य स्तर के प्रमुख विपक्षी दल त्रिनोती कांग्रेस (टीएमसी) ने कल शाम के अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय चुनाव आयोग (ईसी) के गिनती केन्द्र में बीजेपी‑संबद्ध गाड़ियों का अतिक्रमण हुआ, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे। टीएमसी के नेता ने कहा कि यह घटना कल (2 मई) दोपहर के समय राउंड‑लेख में हुई, जहाँ विभिन्न दर्ता‑संबंधी दस्तावेज़ और गिनती मशीनें मौजूद थीं। गवाहों के अनुसार, बीजीपी‑डिज़ाइन की पेंट‑कार्य वाली गाड़ियां बिना अनिवार्य अनुमति के परिसर में प्रवेश कर चुकी थीं।
इसी बीच, भारतीय कुश्ती सितारा वीन्से फोगाट ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि वह पूर्व भारत फ़िटनेस एथलेटिक्स (डब्ल्यूएफआई) प्रमुख पर लगातार उत्पीड़न का शिकार रही हैं। फोगाट ने बताया कि 2024 के अभ्युमानित पदोन्नति दौर में उनके खिलाफ अनुचित दबाव बनाया गया, जिससे उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर असर पड़ा। उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि खेल प्रशासन में जवाबदेही की कमी और संस्थागत सुस्ती ने इस प्रकार के दुरुपयोग को जन्म दिया है।
इन घटनाओं पर प्रशासनिक प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रही। चुनाव आयोग ने कहा कि गिनती केन्द्रों में सुरक्षा और ट्रांसपेरेंसी को सुनिश्चित करने के लिये सभी वाहनों के प्रवेश‑निकास की सख्त निगरानी की जाती है, तथा किसी भी अनियमितता की सूचना मिलने पर तुरंत जाँच शुरू की जाएगी। परंतु टीएमसी ने दर्ज शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने का हवाला दिया, जिससे चुनाव प्रक्रिया में भरोसे की कमी स्पष्ट हो रही है।
खेल मंत्रालय ने फोगाट के आरोपों को “गंभीरता से” लेते हुए कहा कि वह मौजूदा यथार्थ‑जाँच प्रक्रिया को सक्रिय कर रहे हैं और यदि कोई अनुपालन त्रुटि सिद्ध होती है तो उचित कारवाई की जाएगी। हालांकि, इस प्रकार के मामलों में अक्सर लंबी कानूनी लड़ाइयाँ और संघीय अभिकर्ताओं के बीच जिम्मेदारी का टालमटोल देखने को मिलता है, जो खेल‑प्रशासन के पुनर्गठन की आवश्यकता को उजागर करता है।
दोनों मामलों में मुख्य मुद्दा उत्तरदायित्व और नियामक ढांचे की अक्षमता है। काउंटिंग सेंटर में गाड़ियों का प्रवेश केवल एक नियामक चूक नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि चुनाव‑प्रशासन में अनुमानित सुरक्षा मानकों की अनुपालन दर घट रही है। इसी प्रकार, डब्ल्यूएफआई में संचालित पदानुक्रमिक दुरुपयोग दर्शाता है कि संस्थागत जवाबदेही के लिये स्पष्ट, सटीक और समय-सीमा‑बद्ध तंत्र की अनुपस्थिति है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारतीय लोकतंत्र और खेल व्यावस्था दोनों में नीतिगत सुधार की तत्काल आवश्यकता है। नियामक प्राधिकरणों को न केवल मौजूदा लापरवाही को दूर करना चाहिए, बल्कि ऐसी प्रोटोकॉल स्थापित करनी चाहिए जो भविष्य में किसी भी पक्षीय हेरफेर को रोके। तभी प्रशासनिक विश्वास और सार्वजनिक भरोसा पुनः स्थापित हो सकता है।
Published: May 3, 2026