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Category: भारत

गैलेक्सआई के ड्रिश्टी ने भारत की सुदूर सेंसरिंग में नया मुकाम, पहली ऑप्टोसार उपग्रह की लॉन्चिंग

बेंगलुरु स्थित निजी अंतरिक्ष स्टार्ट‑अप गैलेक्सआई ने आज अपना प्रमुख उपग्रह ‘ड्रिश्टी’ को कक्षा में स्थापित किया। ड्रिश्टी भारत का सबसे बड़ा निजी रूप से विकसित पृथ्वी‑अवलोकन उपग्रह है और विश्व का प्रथम ऑप्टिकल‑रडार (ऑप्टो‑एसएआर) उपग्रह, जो क्लाउड‑कवर्ड और अंधेरे माहौल में भी स्पष्ट छवियां प्रदान करता है। यह तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु‑परिवर्तन निगरानी और आपदा‑प्रतिक्रिया में नई संभावनाएँ खोलती है।

उपग्रह के लॉन्च को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि भारत की अंतरिक्ष नीति अब निजी क्षेत्र की नवाचार शक्ति को स्वीकार कर रही है। हालांकि, सार्वजनिक‑निजी भागीदारी के इस महत्वपूर्ण चरण में कई नियामक और संस्थागत चुनौतियाँ बक़ायदा हैं। वर्तमान में डाटा‑शेयरिंग, लाइसेंसिंग और सुरक्षा मानकों पर स्पष्ट दिशा‑निर्देशों की कमी के कारण, ड्रिश्टी द्वारा उत्पन्न बहुमूल्य इमेजरी को विभिन्न सरकारी एजेंसियों तक पहुँचाने में अड़चनें आ सकती हैं।

ऐसे में, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या नीति‑अद्यतन उपलब्ध नहीं है, जिससे यह सवाल उभरता है कि राष्ट्रीय स्तर पर नई तकनीक के लाभों को सिस्टमेटिक रूप से नियोजित करने की तैयारी कितनी पक्की है। सदियों‑पुराने प्रशासनिक ढाँचे की जड़ें अक्सर उत्तरदायित्व और समयबद्ध कार्रवाई में बाधा बनती हैं, जबकि निजी कंपनियाँ नई तकनीकी सीमाओं को तेज़ी से तोड़ रही हैं।

ड्रिश्टी के दोहरे इमेजिंग क्षमताओं—ऑप्टिकल और रडार—से आपदा‑प्रबंधन के अभ्यास में बड़ा सुधार संभव हो सकता है। मौसमी बाढ़, सूखा या भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक‑समय निगरानी से राहत कार्यों की दिशा‑निर्धारण तेज़ हो सकती है। फिर भी, डेटा तक पहुँच के विशिष्ट प्रोटोकॉल, वाणिज्यिक शर्तें और सुरक्षा क्लॉज़ की अस्पष्टता सरकारी एजेंसियों को इस तकनीक के पूर्ण उपयोग से वंचित कर सकती है।

इन परिप्रेक्ष्य में, नीति‑निर्माता और नियामक संस्थाएँ दो प्रमुख कार्यों को तात्कालिकता से अपनाएँ: (i) एक स्पष्ट, पारदर्शी और तेज़ लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क बनाना, जिससे निजी सत्रिंग डेटा का सार्वजनिक उपयोग, विशेषकर राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा‑प्रतिक्रिया में, सुगम हो; तथा (ii) एक समन्वित डाटा‑गवर्नेंस पोर्टल स्थापित करना, जहाँ विभिन्न मंत्रिस्तरीय विभाग, राज्य शासन और स्थानीय निकाय आसानी से उपग्रह‑छवियों को एक्सेस कर सकें।

ड्रिश्टी की सफलता स्वयं में भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश की शक्ति का प्रमाण है, परन्तु यह भी याद दिलाती है कि नवाचार की गति को बेजोड़ बनाये रखने के लिये प्रशासनिक लचीलापन, समय पर निर्णय‑लेना और जवाबदेही की संस्कृति अनिवार्य है। जैसा कि ऑप्टो‑एसएआर तकनीक ने बादलों को भेद दिया है, वैसी ही स्पष्टता और तेज़ी से नीति‑निर्माण को भी एकसाथ चलना चाहिए, तभी भारत अपने अंतरिक्ष‑संसाधनों को वास्तविक लाभ में परिवर्तित कर सकेगा।

Published: May 3, 2026