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Category: भारत

ग्लैक्सआई ई ने लॉन्च किया 'दृष्टि' – भारत का पहला ऑप्टो‑एसएआर उपग्रह

स्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन से 3 मई 2026 को ग्लैक्सआई ई द्वारा 'दृष्टि' नामक उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया। कंपनी ने दावा किया कि यह विश्व का पहला ऑप्टो‑एसएआर (ऑप्टिकल‑सिंथेटिक एपर्चर रडार) उपग्रह है, जो ऑप्टिकल इमेजिंग और सार‑रडार तकनीक को एकीकृत कर उच्च‑रिज़ॉल्यूशन, मौसम‑सुरक्षित वास्तविक‑समय अवलोकन प्रदान करेगा।

भौगोलिक सूचना‑प्रौद्योगिकी (जिओस्पैटियल) के इस कदम के पीछे कई प्रशासनिक तंत्र कार्यरत हैं—विषय‑विशेष विभाग, अंतरिक्ष नीति आयोग, तथा दूरसंचार नियामक उपकरण (टेलीकॉम) मुख्य रूप से लाइसेंस और फ्रीक्वेंसी आवंटन के लिये जिम्मेदार हैं। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने में सालों की प्रतीक्षा के बाद, अंततः 2025 में अंशतः सुधारात्मक दिशा‑निर्देश जारी हुए, जिससे निजी उद्यमों को इस प्रकार की उच्च‑तकनीकी सैटेलाइट्स विकसित करने की अनुमति मिली।

हालांकि, इस सफलता के साथ कई प्रश्न भी उठते हैं। ऑप्टो‑एसएआर तकनीक का द्वैत‑उपयोग (सिविल व मिलिट्री) संभावित सुरक्षा खतरों को बढ़ाता है, परन्तु भारत में इस प्रकार की तकनीक के लिए स्पष्ट नियामक ढाँचा अभी तक पूर्णतः परिभाषित नहीं है। नीति‑निर्माण में निकटता की कमी और संस्थागत सुस्ती ने कंपनियों को कागजी कार्यवाही में अतिरिक्त बाधाओं का सामना कराया, जिससे नवाचार का नियमित प्रवाह बाधित हुआ। इस पर प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी निकला—क्या नियामक निकाय ने समय पर दिशा‑निर्देश जारी कर नवाचार को प्रोत्साहित किया, या फिर अजीब‑अजीब ‘फाइल‑ड्रॉप’ लक्षण को अपनाकर उद्योग को अनिश्चितता में छोड़ दिया?

ग्लैक्सआई ई के संस्थापक ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अंतरिक्ष नीतियों में ‘कंपनी‑मित्रता’ का अभाव है, जबकि इज़राइल व फ्रांस के समान देशों में समान तकनीकों को तेज़ी से वाणिज्यिक रूप से लागू किया जाता है। यह दावा भारत में प्रौद्योगिकी‑निर्माण के प्रति सरकारी हलचल को उजागर करता है—जैसे ही अनुमति मिलती है, वहीँ पर कई अनुगमन‑परिणाम निकासी एवं सुरक्षा जांचें आगे बढ़ती हैं, जिससे बाजार में प्रवेश की गति ठहराव में आ जाती है।

परिणामस्वरूप, 'दृष्टि' उपग्रह ने न केवल भारत को हाई‑रिज़ॉल्यूशन रिमोट‑सेंसिंग में प्रतिस्पर्धी स्थान दिलाया, बल्कि सरकारी नीति‑निर्माण में मौखिक एवं दस्तावेज़ी दोहराव के बड़े अंतर को भी उजागर किया। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि यदि नियामक संस्थानों में प्रक्रिया‑उन्मुख पुनर्संरचना नहीं की गई, तो भविष्य में भी अनेक निजी तकनीकी पहलें उसी ‘प्रकाश‑और‑छाया’ प्रतीक्षा में फँसेंगी।

Published: May 3, 2026