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Category: भारत

कन्नियाकुमारी विधानसभा सीट में एआईएडीएमके के एन. थलवाई सुंदराम ने दाम्पत्य प्रतिद्वंद्विता में जीत हासिल की

तमिलनाडु के दक्षिणी सिरों पर स्थित कन्नियाकुमारी विधानसभा सीट ने 4 अप्रैल 2026 को हुए विधानसभा चुनाव में फिर से सत्ता की सीट बदली। एआईएडीएमके के अनुभवी राजनेता एन. थलवाई सुंदराम ने डीएमके तथा टीवीके के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की, जिससे दो प्रमुख विपक्षी दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा समाप्त नहीं हुई, बल्कि फिर से चुनावी समीकरणों को फिर से लिख दिया गया।

कन्नियाकुमारी का चुनावी इतिहास "बैक‑एंड‑फर्थ" की परिभाषा है। 2016 में डीएमके के एस. ऑस्टिन ने इस कोने को अपने नाम किया था, जबकि 2021 में वही सीट एआईएडीएमके के थलवाई सुंदराम ने जीत ली थी। अब 2026 की इस जीत से स्पष्ट होता है कि दोनों दलों के बीच मतदाता की वफादारी में कोई निरंतरता नहीं है, बल्कि स्थानीय मुद्दों और चुनावी गठबंधनों की गति पर निर्भरता अधिक है।

विजयी संदेश के पीछे चुनाव आयुक्त के कार्यालय की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। मतदान के दौरान कई बुथों पर मतदाता सूची में त्रुटियों और कुछ क्षेत्रों में मतदान मशीनों की अस्थायी बंदिशों की रिपोर्टें आईं। प्रशासन ने इन समस्याओं को तुरंत हल करने का दावा किया, परंतु यह तथ्य कि चुनाव के अंत तक कई नागरिकों को अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करने देना पड़ा, राज्य के चुनावी प्रबंधन की बुनियादी तनों में मौजूद दरार को उजागर करता है।

परिणाम के बाद राज्य सरकार ने तत्काल आनंदमय बयान जारी किया, जिसमें मुख्यमंत्री ने थलवाई सुंदराम को बधाई देते हुए "सबसे बड़े विकास कार्यों की शुरुआत" का वादा किया। परन्तु पिछले दो वर्षों में कन्नियाकुमारी में जलधारा, सड़कों की गति, स्वास्थ्य सुविधाओं और समुद्री किनारे के संरक्षण हेतु लागू योजनाओं में उल्लेखनीय गति नहीं दिखी। यह संस्थागत सुस्ती का परिचायक है, जहाँ केंद्र और राज्य के बीच के निधि प्रवाह को कई बार बोझिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

नियोजन के मामलों में भी समानता दिखती है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित विशेष आर्थिक क्षेत्र की अनुमति अभी तक परिप्रेक्ष्य में नहीं आई है, जबकि समान प्रस्ताव अन्य राज्यों में तेजी से कार्यान्वित हो चुके हैं। इस प्रकार नीतिगत ढांचे में व्यवहारिकता की कमी, योजना‑निर्माण के बाद कार्यान्वयन में गहरी खाई को दर्शाती है।

सार्वजनिक जवाबदेही के प्रश्न भी उठते हैं। उम्मीदवारों के अभियान में अनेक वादे किए गए थे— जलवायु अनुकूलन के लिये समुद्री जलवायु प्रबंधन, स्थानीय शिक्षा संस्थानों में डिजिटल आधारभूत सुविधा, तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में औषधीय स्टॉक की समयबद्ध आपूर्ति। लेकिन इन वादों की प्राप्ति का मार्ग स्पष्ट नहीं होता, और न ही स्वतंत्र निगरानी संस्थानों द्वारा इसका नियत समय पर मूल्यांकन किया गया।

कन्नियाकुमारी की इस चुनावी जीत को एक अवसर मानते हुए यह आवश्यक है कि प्रशासनिक एजेन्डा को केवल जीत की खुशी में बदलने के बजाय, ठोस बुनियादी ढांचा, समयबद्ध निधि प्रवाह और पारदर्शी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए। केवल तब ही इस क्षेत्र में स्थायी विकास संभव हो पाएगा, और इस प्रकार किफ़ायती शासन एवं जवाबदेही का वास्तविक अर्थ सामने आएगा।

Published: May 4, 2026