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Category: भारत

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क्रू में दो भारतीय साथियों वाली हंटावायरस ग्रसित जहाज पर प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक जहाज़ पर अंधेरे में छिपे एन्डीस हंटावायरस के प्रकोप ने दो भारतीय चालक दल के सदस्यों को भी प्रभावित किया, जिससे भारत में स्वास्थ्य एवं विदेश नीतियों की तत्परता पर सवाल उठाए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि यह बीमारी मानवीय संक्रमण के मामले में कोविड‑19 से कई गुना प्रतिबंधित है; संक्रमण के लिए निकट संपर्क ही पर्याप्त होता है। इसी कारण उन्होंने त्वरित जोखिम को ‘शून्य’ घोषित किया, परन्तु यह निर्णय प्रशासनिक प्रोटोकॉल की पारदर्शिता को चुनौती देता है।

इंडियन कंट्रोल सेंटर फॉर रोग निगरानी (ICMR) ने कहा कि भारत ने पहले भी इस प्रकार के केसों को अलग‑अलग रूप से दर्ज किया है, पर कोई व्यापक अपठ्य रेकॉर्ड नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तत्क्षण राष्ट्रीय संकट प्रबंधन योजना के अंतर्गत उत्तरदायी इकाइयों को सतर्क करने का बयान जारी किया, जिसमें पोर्ट्स की क्वारंटीन सुविधा, समुद्री स्वास्थ्य निगरानी और संभावित केसों के लिये उपचार प्रोटोकॉल शामिल हैं। लेकिन इस घोषणा में ठोस समय‑सीमा और कार्यान्वयन योजना का अभाव सार्वजनिक भरोसा को कमजोर करता है।

विदेश मंत्रालय ने भारतीय टीम के लिए कूटनीतिक सहायता का आश्वासन दिया, परन्तु समुद्री गैर‑स्थल पर संचालित होना, कार्यशैली में अंतर और सीमा‑पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा की कमी, इन मुद्दों पर गंभीर विचार नहीं किया गया। एक सन्देश स्पष्ट है: पोर्ट-ऑफ़-इंट्री पर स्वास्थ्य जांच के मानक अभी भी अस्पष्ट हैं, जबकि समानांतर में अंतरराष्ट्रीय जलड़ियों पर रोग‑नियंत्रण प्रणाली का अभाव है।

नीति‑निर्माताओं के लिए यह एक चेतावनी का संकेत है कि ‘प्री‑इमर्जेंसी’ पर बने रहना आवश्यक है, न कि केवल ‘इमरजेंसी’ के बाद प्रतिक्रिया देना। वर्तमान में, इंटेग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के तहत समुद्री परिदृश्य को विशेष मॉड्यूल नहीं दिया गया है, जिससे राष्ट्रीय रोग‑निगरानी में अंतराल बना रहता है। इस खाई को पाटने हेतु पोर्ट‑आधारित क्वारंटीन हब, अंतरराष्ट्रीय समुद्री स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के साथ तालमेल और समुद्री कर्मियों के लिये नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य हो जाना चाहिए।

सार में कहा जाए तो, दो भारतीयों के इस दुर्लभ वायरस से ग्रस्त जहाज़ में मौजूद होने से भारत को कोई तत्काल महामारी‑भय नहीं है, परन्तु यह घटना प्रशासनिक प्रतिक्रिया में मौजुद चूक, नीति‑निर्माण में अंधाधुंधता और संस्थागत उत्तरदायित्व में कमी को उजागर करती है। यह समय है कि सरकार न केवल आकस्मिक उपायों से बल्कि सतत, स्पष्ट और जवाबदेह समुद्री स्वास्थ्य ढांचे से इस ‘छींक’ को रोकने की दिशा में कदम बढ़ाए।

Published: May 9, 2026