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कांग्रेस ने डिक्यू के साथ 11 साल का गठबंधन तोड़ दिया
नई दिल्ली (रिपोर्ट): 7 मई 2026 को कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक रूप से ड्राविडा मुनेत्रा कज़हगी (डिक्यू) के साथ 11 साल के गठबंधन को समाप्त करने की घोषणा की। यह कदम, जो राष्ट्रीय स्तर पर बन रहे विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) को नुकसान पहुँचा रहा है, मुख्य रूप से तमिलनाडु सीट‑वाटर विवाद को कारण मानता है।
गठबंधन के टूटने के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आए हैं। पहला, कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्यक्ष प्रत्याशी प्रस्तुत करने के लिए अधिक सीटें माँगीं, जबकि डिक्यू ने राज्य‑विशिष्ट राजनीति के हस्तक्षेप को प्राथमिकता दी। दूसरा, दोनों दलों के बीच पूर्वनिर्धारित उम्मीदवार सूची को लेकर अंतर्विरोध बढ़ता गया, जिससे पार्टी नेतृत्व के बीच विश्वास की कमी स्पष्ट हो गई।
डिक्यू के प्रमुख एमके स्टेफ़न ने इस कदम को "राष्ट्रवादी गठबंधन की अनिवार्य कसरत" कहा, यह संकेत देते हुए कि पार्टी अपने प्रदेशीय आधार को कमजोर नहीं होने देगी। कांग्रेस अध्यक्ष मलिकरजून खर्गे ने कहा कि "समान विचारधारा के बिना गठबंधन बेकार है" और नई गठबंधन रणनीति तैयार की जाएगी।
इस राजनीतिक उथल‑पुथल के बीच भारत के चुनाव आयोग (EC) ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी पक्षीय कृती पर हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन सभी दलों को अनुचित प्रथा से बचने और नियमानुसार चुनाव घोषणा का पालन करने का आग्रह किया। इस बात से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक इकाई अब सिर्फ नियम लागू करने तक सीमित है, जबकि राजनीतिक व्यवधानों को रोकने की क्षमता में उसकी निरंतर “स्थिरता” पर सवाल उठता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विकास विपक्षी ब्लॉक की दोधारी योजना को कमजोर करेगा। बिना समन्वित सीट‑वाटर के, राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट प्रतिपक्षी एजेंडा बनाना कठिन हो जाएगा और यह सरकार को अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर सकता है। साथ ही, यह घटना कई नीतिगत प्रश्न उठाती है: गठबंधन राजनैतिकता में किस हद तक संस्थागत उत्तरदायित्व और निरंतरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और क्या विरोधी दलों को राष्ट्रीय मुद्दों की बजाय राज्य‑विशिष्ट गणना में फँसने की प्रवृत्ति नहीं होती?
भविष्य में, कांग्रेस को नई गठबंधन रणनीति तैयार करनी होगी, संभवतः बिडीएल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या अन्य छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर। वहीं डिक्यू को अपने प्रदेशीय शक्ति आधार को कायम रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज़ सुनाने के नए साधन तलाशने पड़ेंगे। इस क्षणिक असहमति ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय राजनैतिक स्थिरता अक्सर व्यक्तिगत गठबंधन समझौतों पर निर्भर करती है, न कि किसी ठोस नीति‑निर्धारण या संस्थागत जवाबदेही पर।
Published: May 7, 2026