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ऑपरेशन सिंधूर: सरकार का जवाब, लेकिन नीति‑निर्माण में खामियों की चेतावनी
नई दिल्ली, 7 मई 2026 – पहलगाम में शंका रहित भारतीय यात्रियों पर हुए हिंसक हमले के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंधूर को ‘जोखिम उठाने वालों के लिये उपयुक्त प्रतिक्रिया’ कहा। इस बयान ने तत्काल सुरक्षा उपायों को सराहते हुए यह भी उजागर किया कि मौजूदा व्यवस्था में कई सूक्ष्म खामियाँ बनी हुई हैं।
घटना का पृष्ठभूमि
जुलाई 2025 में जम्मू‑कश्मीर के पहलगाम में विदेशी पर्यटकों के साथ भारतीय यात्रियों पर अचानक झड़ने वाली गोलीबारी ने कम से कम पाँच लोगों की जान ली और कई को गंभीर चोटें आईं। प्राथमिक जांचें दर्शाती हैं कि इस हमले की योजना स्थानीय कट्टर तत्वों ने बनाई थी, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में संस्थागत निगरानी की गिरावट को भुनाने में सफल हुए।
ऑपरेशन सिंधूर का परिचय
सरकार ने इस घटना के प्रत्युत्तर में ‘ऑपरेशन सिंधूर’ नामक एक व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया। इस योजना के तहत:
- सुरक्षा बलों की तैनाती को दो गुना कर सीमावर्ती गाँवों में चौकियों की संख्या बढ़ाई गई;
- स्थानीय खुफिया नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिये विशेष दल गठित किए गए;
- अपराधियों की पहचान हेतु ड्रोन‑आधारित सैटेलाइट इमेजिंग और एआई‑सक्षम निगरानी प्रणाली लागू की गई।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह “सही समय पर, सही दिशा में” ली गई प्रतिक्रिया है, जो राष्ट्रीय अभिरक्षा की दृढ़ता को दर्शाती है।
नीति‑निर्माण में दिखी खामियां
हालांकि ऑपरेशन की तत्परता प्रशंसनीय है, कई बिंदु पर प्रशासन की निरंतर अक्षमता उजागर होती है:
- पहले से ही अस्तित्व में मौजूद सुरक्षा योजना का असफल कार्यान्वयन: 2023‑24 में जारी जammu‑Kashmir सुरक्षा सुचना नीति के बावजूद, सीमावर्ती क्षेत्रों में एंटी‑टेरर फ़ाइलिंग में 40 % गिरावट दर्ज की गई थी।
- स्थानीय प्रशासन में संचार की कमी: पायलट प्रोजेक्ट के दौरान कई ग्राउंड‑लेवल पुलिस अधिकारी एक ही सूचना को दो‑तीन बार दर्ज कराते रहे, जिससे कार्यवाही में विलंब हुआ।
- सार्वजनिक जवाबदेही का अभाव: हमले के बाद रोज़गार मंत्रालय और विकास विभाग ने किसी भी प्रकार की राहत या पुनर्वास योजना की घोषणा नहीं की, जिससे पीड़ितों की स्थिति और बिगड़ गई।
इन पहलुओं से स्पष्ट है कि आपातकालीन कार्रवाई को प्राथमिकता देने के साथ-साथ दीर्घकालिक नीति सुधार को पक्ष में नहीं रखा गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और सार्वजनिक प्रभाव
ऑपरेशन के प्रारम्भिक दिनों में सुरक्षा बलों ने कई आपराधिक गिरोहों को धरधस किया, परन्तु लोगों के मन में अब भी भय बना हुआ है। स्थानीय व्यवसायियों ने बताया कि पर्यटन उद्योग में पहले से ही 30 % गिरावट आई है, क्योंकि यात्रियों का भरोसा टूट चुका है। नागरिक समूह ‘सुरक्षा‑सतर्क’ ने सरकार से शीघ्र ही एक स्वतंत्र जांच आयोग की मांग की, जो न केवल घटना की जड़ तक पहुँचे बल्कि भविष्य की नीतियों के लिए दिशा-निर्देश भी तैयार करे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री द्वारा ऑपरेशन सिंधूर को ‘उचित’ कहना निश्चित रूप से सरकार की तत्परता को दर्शाता है, मगर यह भी संकेत देता है कि मौजूदा सुरक्षा ढांचा कई बार विफल रहा है। नीति‑निर्माताओं को अब केवल तीव्र प्रत्युत्तर ही नहीं, बल्कि सतत निगरानी, पारदर्शी जवाबदेही और जमीनी स्तर पर सशक्त प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता है। अन्यथा, भविष्य में समान हमला दोहराया जा सकता है, और ‘ऑपरेशन सिंधूर’ का नाम केवल एक अल्पकालिक जीत से अधिक कुछ नहीं रहेगा।
Published: May 7, 2026