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ऑपरेशन सिंधूर की पहली सालगिरह पर पीएम मोदी और मंत्रियों ने बदले प्रोफ़ाइल चित्र, नीति‑निर्माण की दिशा पर सवाल
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जैसाṅकर सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने बीते कल स्नैपशॉट में अपने X (पूर्व में ट्विटर) प्रोफ़ाइल चित्र बदल कर "ऑपरेशन सिंधूर" के पहले वर्षगांठ को चिह्नित किया। यह प्रतीकात्मक कार्य सामाजिक मंच पर राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना को जागृत करने के इरादे से किया गया, परन्तु इसके पीछे निहित सरकारी कार्य‑प्रणाली की ठहराव‑भरी व्याख्या ने कई प्रश्न उठाए हैं।
ऑपरेशन सिंधूर का आरम्भ पाहलगाम आतंकवादी हमले के बाद किया गया था। भारत के सैन्य बलों ने इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान‑कब्ज़ा जम्मू‑कश्मीर (PoJK) में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर एक साथ दो प्रहार किए, जहाँ लॉन्चपैडों को नष्ट कर दो सौ से अधिक आतंकियों के मौत के साक्षी बन गए। सरकार ने इसे "साहसिक और देशभक्ति" का उदाहरण कहा, जबकि वास्तविक रणनीतिक लक्ष्य, दुश्मन की पुनरावृत्ति रोकने की क्षमता और द्विपक्षीय संजोगों पर गहरा विचार नहीं किया गया।
सूक्ष्म विश्लेषण से स्पष्ट है कि बड़े‑पैमाने पर सैन्य कृत्य को सोशल‑मीडिया पर चमकाने की प्रवृत्ति प्रशासकीय जवाबदेही को टालने की ओर इशारा करती है। प्रोफ़ाइल चित्र बदलते समय कोई नयी कूटनीतिक पहल, सीमित सीमा प्रबंधन या आतंकवाद के लिए स्थायी रोकथाम उपायों का जिक्र नहीं किया गया। इसके उलट, यह संकेत देता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को संदेशात्मक मंच में बदल कर उसे विचार‑परिवर्तन के वास्तविक साधन से दूर कर रही है।
निष्कर्षतः, ऑपरेशन सिंधूर की वर्षगांठ का प्रभाव केवल सैन्य आँकड़ों में नहीं, बल्कि नीति‑निर्माण में मौजूदा खाई में भी निहित है। सरकार को चाहिए कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा की अभिव्यक्ति को शोर‑गुल वाले प्रोफ़ाइल चित्रों से परे, पारदर्शी संवाद, दुश्मन‑केंद्रित कूटनीति और आतंकवाद‑विरोधी रणनीतियों के ठोस अद्यतन में परिवर्तित करे। अन्यथा, यह डिजिटल प्रतिकृति केवल एक "रंगीन" जलेबी बन कर रह जाएगी, जिसमें वास्तविक तड़का – संस्थागत गति और जनता के भरोसे की पुनर्स्थापना – अभी तक नहीं मिला।
Published: May 7, 2026