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Category: भारत

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इलेक्शन कमीशन ने चुनाव दिवस पर 68 लाख साइबर हमलों का मुकाबला कर सुरक्षित मतगणना सुनिश्चित की

भारत में आज के बहुप्रतिक्षित राष्ट्रीय चुनाव में मतदान प्रक्रिया के साथ-साथ गिनती के चरण में 68 लाख से अधिक साइबर हमलों का खुलासा किया गया। ये आँकड़े इलेक्शन कमीशन (ईसी) के समन्वित नेटवर्क मोनिटरिंग प्रणाली द्वारा दर्ज किए गए हैं, जो मतदाता अभिरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) एवं इस्पोटिंग सिस्टम (आइएसओ) की स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किए गए थे।

ईसी ने बताया कि सभी पहचाने गए हमलों को रीयल‑टाइम में ब्लॉक किया गया और कोई भी अनधिकृत डेटा प्रवेश नहीं हुआ। इस सफलता के पीछे कई स्तरों पर तैयार सुरक्षा उपायों का जाल था: एन्क्रिप्टेड संचार, बहु‑स्तरीय फ़ायरवॉल, तथा साइबर इन्फ़ॉर्मेशन रिस्पॉन्स टीम (सर्ट‑इन) के साथ त्वरित सूचना‑साझाकरण। इलेक्ट्रॉनिक मतगणना परिणामों को संभालने वाले सर्वर क्लस्टर को पृथक (ऑफ़लाइन) वातावरण में रखा गया, जिससे वह संभावित जालसाज़ी से निष्क्रिय रहता।

हालांकि, एनीरोगत अंदाजों से सरकार को इन आँकड़ों को पहले से सार्वजनिक रूप से प्रोफ़ाइल करने में हिचकिचाहट दिखी, जिससे नागरिकों में अस्थायी अटकलबाज़ी और अनावश्यक अटकलें पनप गईं। इस पर कई नीति‑विशेषज्ञों ने सरकार की संचार रणनीति में खामियों को उजागर किया, यह तर्क देते हुए कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल तकनीकी सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि पारदर्शी एवं समयबद्ध सूचना खुलासे पर भी निर्भर करती है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया के प्रमुख बिंदु में 24‑घंटे के इलेक्ट्रॉनिक जोखिम प्रबंधन डैशबोर्ड का संचालन, तेज़ी से अपडेट होने वाले खतरों की रैंकिंग, तथा प्रत्येक राज्य चुनाव अधिकारी को तत्काल सुधारात्मक निर्देश जारी करना शामिल था। फिर भी, ईसी के वरिष्ठ अधिकारियों को यह स्वीकार करना पड़ा कि पिछले दो चुनावों में कई छोटे‑स्तरीय साइबर अनभिज्ञान (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को पर्याप्त रूप से सुदृढ़ नहीं किया गया था, जिससे आज के व्यवस्थित विरोध में “संस्थागत सुस्ती” के आरोप फिर से उभरे।

नीति‑निर्माण परिदृश्य में यह घटना कई प्रश्न उठाती है: क्या मौजूदा राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति में चुनाव‑सम्बंधित डिजिटल अभियानों के लिए विशेष प्रावधान पर्याप्त हैं? क्या सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय और राज्य‑स्तर के चुनाव कार्यालयों के बीच सहयोग के तंत्र में कोई नियोजित सुधार हुआ है? विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एन्क्रिप्टेड ब्लॉकचेन‑आधारित वोटिंग लॉग, तथा एक स्वतंत्र राष्ट्रीय चुनाव साइबर‑रेस्पॉन्स एजेंसी की स्थापना, प्रणालीगत खामियों को भरने में मददगार होगी।

इस प्रकार, 68 लाख साइबर हमलों के बावजूद मतगणना को सुरक्षित रखने में ईसी की तकनीकी सफलता एक प्रशंसा योग्य मील का पत्थर है, पर यह भी स्पष्ट करता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने के लिये निरंतर नीति‑समीक्षा, तेज़ प्रशासनिक निर्णय‑लेना, और सार्वजनिक जवाबदेही के स्पष्ट मानकों की आवश्यकता है।

Published: May 6, 2026