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इलेक्ट्रॉनिक गणना दिवस पर ईसी ने 68 लाख साइबर हमलों को रोका
नई दिल्ली – 6 मे 2026 को चल रही राज्य‑स्तरीय चुनावों के गिनती दिवस पर इलेक्शन कमिशन (ईसी) ने 68 लाख संकीर्ण साइबर हमलों का सामना किया और उन्हें निरोद्ध करने में सफल रहा। यह आंकड़ा, जिसमें डिनायल‑ऑफ़‑सर्विस (DoS), फ़िशिंग और मैलिसियस सॉफ़्टवेयर का मिश्रण शामिल था, ईसी की साइबर सुरक्षा इकाई की तत्परता को उजागर करता है, साथ ही मौजूदा सुरक्षा ढाँचे में निहित कई कमजोरियों की भी स्पष्ट निन्दा करता है।
गिनती से पहले रात 12 बजे से ही अज्ञात स्रोतों से ट्रैफ़िक में असामान्य वृद्धि देखी गई। ईसी की सिट्रिक्स ऑपरेशन सेंटर (SOC) ने 03:15 घंटे पर प्रथम अलर्ट जारी किया और तुरंत राष्ट्रीय सायबर सुरक्षा एजेंसी (CERT‑IN) तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (ITD) से समन्वय स्थापित किया। दो‑तीन घंटे के भीतर, ईसी के डिजिटल फायरवॉल ने 68 लाख हमलों के 92 % को ब्लॉक कर दिया, जबकि शेष 8 % को वैकल्पिक मार्गों से निराकरण किया गया।
ईसी के मुख्य अधिकारी (सीईओ) अजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, “हमारी प्राथमिकता साबित हुई है – निर्वाचन प्रक्रिया के हर डिजिटल चरण की अखंडता सुरक्षित रखना। हम विस्तृत लॉग, रीयल‑टाइम एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस‑आधारित सिग्नेचर‑मैपिंग के माध्यम से इस अनुपालन को सुनिश्चित कर रहे हैं।” हालांकि, इस सार्वभौमिक प्रशंसा के पीछे प्रशासनिक ढाँचे की अनिवार्य धीमी गति की निरंतर शिकायतें गूँज रही हैं।
सरकार ने तुरंत एक “साइबर सुरक्षा समीक्षा समिति” गठित करने का ऐलान किया, जिसमें ITD, ईसी, और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हालांकि, कई विशेषज्ञों ने इस कदम को सिर्फ “रिपोर्ट‑कार्ड” तक सीमित रहने का खतरा बताया। भारत में चुनाव‑सम्बंधी डिजिटल बुनियादी ढाँचा 2019 के बाद से बड़े पैमाने पर अपडेट नहीं हुआ, जबकि वैश्विक स्तर पर साइबर‑धमकियों की तीव्रता में वार्षिक 30 % की वृद्धि दर्ज की गई है।
साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ, प्रो. विनीत शर्मा (एनआईटी, दिल्ली) ने कहा, “ईसी की तुरंत प्रतिक्रिया सराहनीय है, पर यह दर्शाता है कि हमारे मौजूदा प्रणालियों में पहले से ही एक बड़ी खाई मौजूद थी। 68 लाख हिट्स की संख्या यह संकेत देती है कि एक व्यवस्थित, संभवतः विदेशी‑समर्थित, अभियान चल रहा था, जिसके लिए तैयारियों का अभाव स्पष्ट था।” उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा, “संकट के बाद ‘सुरक्षा‑अपग्रेड’ के बजट की घोषणा तो ठीक है, पर मुख्य बात यह है कि स्थायी, नियम‑आधारित साइबर फ्रेमवर्क, निरंतर प्रशिक्षण और त्वरित प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए।”
वर्तमान में, विपक्षी दलों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। प्रमुख विपक्षी नेता लीना फॉक्स ने संसद में प्रश्न उठाते हुए कहा, “यदि ईसी को इस प्रकार के हमलों को रोकने के लिए अपनी ही नेटवर्क को दोबारा बनाना पड़े, तो आगे चलकर हमारे लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ किन जोखिमों का सामना कर सकती हैं?” इस पर सरकार ने उत्तर दिया कि “भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को न्यूनतम करने हेतु निरंतर मॉनिटरिंग, वैकल्पिक सर्वर‑क्लस्टर और राष्ट्रीय स्तर पर रेगुलेटरी साइबर‑इन्क्वायरी स्थापित की जाएगी।”
अंततः, 68 लाख साइबर हिट्स को निरोद्ध करने वाला ईसी का तेज़ कदम, एक ओर भारतीय लोकतंत्र की डिजिटल सुरक्षा में सुधार की इच्छा प्रकट करता है, तो दूसरी ओर मौजूदा नीतिगत ढाँचे की अक्षमता, धीमी संस्थागत प्रतिक्रिया और अधूरा नियामक इकोसिस्टम स्पष्ट रूप से सामने लाता है। समीक्षकों का मानना है कि केवल “साइबर‑धमकी‑निरोधक” उपायों के बजाय, पूरी‑इकोसिस्टम में ‘डेटा‑सुरक्षा‑पहला’ सिद्धांत को बुनियादी कानून में उतारना आवश्यक है—ताकि अगली बार ‘गिनती दिवस’ पर केवल आँकड़े ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की कसौटी पर भी भरोसा किया जा सके।
Published: May 7, 2026