असम विधानसभा चुनाव 2026: लाइव वोट‑गिनती का समय‑सारणी और प्रशासनिक चुनौतियाँ
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में 2026 के विधान सभा चुनाव का परिणाम निर्धारित करने हेतु मतगिनती का शेड्यूल आज सार्वजनिक किया गया। निर्वाचन आयोग ने 4 मई 2026 को सुबह 09:00 बजे से लेकर शाम 18:00 बजे तक सभी 126 सीटों की गिनती का विस्तार किया है। यह समय‑सारणी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रही है, क्योंकि इस क्रम में तकनीकी बाधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों को उजागर किया गया है।
गिनती के समग्र चरण को तीन भागों में बाँटा गया है: (i) 09:00‑12:00 – उत्तर‑पूर्वी जिलों की गिनती, (ii) 12:00‑15:00 – मध्य‑असम के 60 प्रतिशत स्कॉर्टान, (iii) 15:00‑18:00 – शेष शहरी एवं दुर्गम क्षेत्रों की गिनती। जबकि यह क्रम औपचारिक तौर पर सुगठित प्रतीत होता है, असम की जटिल भौगोलिक और जलवायु स्थितियों को देखते हुए लॉजिस्टिक जोखिमों को कम नहीं किया जा सकता।
लाइव फॉलो‑अप के लिये राष्ट्रपति चुनाव पोर्टल (https://results.eci.gov.in), राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल (NDTV, Doordarshan), तथा प्रमुख डिजिटल समाचार एग्रीगेटर्स पर नज़र रखी जाएगी। इस समय‑सारणी में इंटरनेट‑आधारित स्ट्रीमिंग पर विशेष जोर दिया गया है, जो पिछले चुनावों में धीमी गति की शिकायतों को दूर करने के लिये एक व्यावहारिक कदम माना गया है। परन्तु, असम के कई दूरस्थ गांवों में अभी भी 2G/3G नेटवर्क की कमी है, जिससे डिजिटल प्रतिवेदन में असमानता की आशंका बनी रहती है।
इस प्रक्रिया के प्रमुख नियामक – स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (ECI) – ने घोषणा के साथ ही कहा कि सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तथा वैकल्पिक वोट‑स्ट्रिंग सिस्टम (VVPAT) का परीक्षण 24 घंटे पूर्व ही पूर्ण हो चुका है। तथापि, पिछले दो चक्रों में मशीन‑कोडिंग त्रुटियों और डेटा‑सिंक्रोनाइज़ेशन की शिकायतें दर्ज हुई थीं। इसलिए, इस बार अतिरिक्त तकनीकी निगरानी टीमों को तैनात किया गया है, परन्तु उनकी पर्याप्तता पर सवाल अभी भी बना हुआ है।
राज्य प्रशासन की प्रतिक्रिया में असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि “सभी जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती 5000 से अधिक पदों पर होगी” तथा “ड्रोन‑आधारित निगरानी के माध्यम से किसी भी अनियमितता को रीयल‑टाइम में रिपोर्ट किया जाएगा”। यह बयान मौखिक आश्वासन से अधिक नहीं है, क्योंकि पहले की रिपोर्टें दर्शाती हैं कि चुनाव‑परिस्थितियों में सुरक्षा की कमी का कारण अक्सर संचार‑भ्रष्टाचार और स्थानीय भीड़‑प्रबंधन की लापरवाही रहा है।
नीति‑निर्माताओं की आलोचना भी इस चरण में स्पष्ट हो रही है। असम के कई स्थानीय एजेंसियों ने दर्शाया है कि मतदान केंद्रों को सुसज्जित करने के लिये आवश्यक फंड का अधिकांश भाग अनिर्धारित रूप से “विलंबित” हो गया, जिससे कागजी दस्तावेज़ों की कमी और मतदाता सूची में त्रुटियों की संभावना बढ़ी। इन मुद्दों को सरकार ने “प्रशासनिक अकार्र्यता” के रूप में वर्गीकृत किया है, परन्तु विश्वसनीय सुधारात्मक कदम अभी तक नहीं दिखे।
अंत में, असम के 2026 के चुनाव में गिनती की विस्तृत समय‑सारणी जनता को सूचना प्रदान करने के लिये सराहनीय है, परन्तु वास्तविक निष्पादन में तकनीकी अधोसंरचना, दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क‑सुधार, और संस्थागत उत्तरदायित्व की कमी प्रमुख बाधाएँ बन कर उभरी हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिये केवल घोषणा नहीं, बल्किः ठोस नीति‑निर्माण, त्वरित फंड वितरण और निगरानी एजेंसियों की स्वतंत्र शक्ति आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता भी स्थापित हो सके।
Published: May 3, 2026