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Category: भारत

45 वर्ष की आयु के बाद अस्पताल में भर्ती का जोखिम दो गुना, एनएसओ आंकड़े उजागर

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) ने हाल ही में जारी किए गए विस्तृत स्वास्थ्य सर्वेक्षण में यह स्पष्ट किया कि 45 वर्ष की आयु पार करने के बाद किसी व्यक्ति के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना लगभग दो गुनी हो जाती है। यह प्रवृत्ति शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रकट हुई, जिससे भारत के जनसांख्यिकी‑परिवर्तन के साथ स्वास्थ्य‑सेवा प्रणाली के तैयारियों पर प्रश्नचिन्ह खड़े होते हैं।

डेटा के अनुसार, 45‑49 वर्ष के समूह में वार्षिक अस्पताल प्रवेश 4.2% था, जबकि 30‑34 वर्ष के समूह में यह मात्र 1.9% रहा। 55 वर्ष से ऊपर के आयु वर्ग में यह अनुपात 9.5% तक पहुँच गया। इस तीव्र वृद्धि को मुख्यतः गैर‑संचारित रोगों (एनसीडी) की प्रचलितता, जीवनशैली में परिवर्तन और प्रतिरक्षा‑संबंधी गिरावट के साथ जोड़ा गया है।

परिणामस्वरूप, नीति‑निर्माताओं को अब मौजूदा एकीकृत स्वास्थ्य‑सेवा योजना (इंडियन हेल्थकेयर सिस्टम) की अक्षमताओं पर पुनर्विचार करना अनिवार्य हो गया है। मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य‑केन्द्र (पीएचसी) नेटवर्क में पर्याप्त जनसंख्या‑आधारित स्क्रीनिंग, जाँच‑परीक्षण और निरोधक देखभाल के साधन नहीं हैं। दवा‑सुरक्षा, एम्बुलेंस सेवा और बेड‑ऑक्यूपेंसी के आंकड़े तब भी कई राज्यों में राष्ट्रीय मानकों से पीछे हैं।

सरकार ने आयु‑आधारित स्वास्थ्य बीमा (अभिकरण) का परिचय कराते हुए प्रतिबद्धता जताई है, परन्तु एनएसओ के आंकड़े दर्शाते हैं कि वास्तविक कवरेज और गुणवत्ता दोनों में बड़ा अंतर है। राष्ट्रीय योजना 2025‑30 के तहत “स्मार्ट हेल्थ” के नाम से घोषित डिजिटल रोग‑निदान मंच ने भी इस जनसांख्यिकीय विसंगति को ठीक करने में पर्याप्त ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

इस विरोधाभास पर नीति‑विश्लेषकों ने कहा है कि आंकड़े तो उपलब्ध हैं, पर उनका प्रयोग करके समयसापेक्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति बनाना ही प्रशासनिक सच्चाई है। यदि 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को रोकथाम‑केंद्रित देखभाल न मिलती, तो अनुपातहीन प्रवेश, बीमारियों की लोडिंग और स्वास्थ्य‑बजट में अप्रत्याशित दबाव बने रहेंगे।

संक्षेप में, एनएसओ का यह नया प्रकाशन प्रशासन को दो‑पैरे चेतावनी देता है: जनसंख्या‑आधारित जोखिम को आँकड़ों में ही नहीं, बल्कि कार्यान्वयन‑स्तर पर भी पहचानें, नहीं तो अगले दशक में अस्पतालों के व्यस्त हॉल में संख्याएँ केवल आँकड़े नहीं, जिंदगियों के भार बनकर उभरेंगी।

Published: May 5, 2026