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2024 में लापरवाह ड्राइविंग से रोज़ 495 मौतें: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की चेतावनी
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी 2024 के आँकड़े दिखाते हैं कि लापरवाह ड्राइविंग के कारण भारत के सड़कों पर प्रतिदिन 495 लोग मारक दुर्घटनाओं में मरते हैं। यह संख्या वर्ष के कुल 180,675 मौतों के बराबर है, जो देश के कुल सड़क मृत्यु दर को फिर से प्रश्न के घेरे में ले आती है।
सड़क सुरक्षा के प्रमुख दायित्व में केन्द्र और राज्य सरकारें, परिवहन विभाग, पुलिस तथा मोटर वाहन नियामक एजेंसियां शामिल हैं। जबकि केन्द्र ने 2019 में मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम और 2021 में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति लाकर नियमन को मजबूत करने का वादा किया, वास्तविक प्रवर्तन में तथ्यभेद स्पष्ट है। अधिकांश राज्य अभी भी ट्रैफ़िक नियमों की निगरानी के लिये पर्याप्त तकनीकी साधन और कर्मियों की कमी का सामना कर रहे हैं।
आँकड़ों के अनुसार, तेज गति, शराबी ड्राइविंग, हेल्मेट व सीट बेल्ट के अपर्याप्त उपयोग और अत्यधिक लोडिंग प्रमुख कारण हैं। इन बुनियादी मुद्दों के समाधान हेतु कई बार अस्थायी उपाय, जैसे कालीन दंड वृद्धि या अस्थायी रोकथाम अभियान, अपनाए गए, परन्तु उनका निरंतर पालन नहीं हो पाया। यह केवल नीति‑निर्माण की चमक है, प्रशासनिक जमीनी स्तर पर ठोस कदम की कमी को छुपाता है।
परिवहन मंत्रालय ने 2022 में रोड‑सेफ़्टी कैमरों की तैनाती की घोषणा की, पर 2024 तक केवल 12 % हाई‑रिस्क डेस्क को ही ये उपकरण प्राप्त हुए हैं। इसी तरह, राज्य सरकारों ने सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए, पर अंतर्जाल में उपलब्ध आंकड़े दिखाते हैं कि सार्वजनिक ज्ञान में वृद्धि स्थानीय स्तर पर सीमित रही।
केंद्रीय और राज्य प्रशासन की प्रतिक्रिया अक्सर ‘तुरंत उपाय’ की घोषणा तक सीमित रह जाती है, जबकि दीर्घकालिक रणनीति, जैसे ड्राइवर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण, सड़कों की डिज़ाइन में “सुरक्षा‑प्राथमिक” मानदंडों को लागू करना, और इंश्योरेंस कवरेज को अनिवार्य बनाना, अभी भी कागज़ी चर्चा में ही बनी हुई हैं।
नीति‑निर्माताओं का यह आश्चर्यजनक आंकड़ा केवल आँकड़े नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती और संस्थागत अकार्यक्षमता का परिणाम है। जब राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्य निर्धारित किया गया – 2025 तक सड़क पर मौतों को 50 % तक घटाना – तो इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आवश्यक संसाधन आवंटन, जवाबदेही ढाँचा और सख्त निगरानी तंत्र अभी भी अधूरा है।
सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए एकीकृत राष्ट्रीय दायित्व‑संकल्प, जिसमें राज्य‑स्तरीय पुलिस को सशक्त करने, रीयल‑टाइम डेटा विश्लेषण को अपनाने, और नागरिकों के लिए शिकायत पंजीकरण को सरल बनाने के उपाय सम्मिलित हों, अनिवार्य दिखता है। अन्यथा, प्रत्येक गुजरते दिन के साथ 495 अनावश्यक मौतें एक न जीता जा सकने वाला आँकड़ा बन जाती रहेंगी, जिससे प्रशासनिक भरोसे में दीर्घकालिक क्षति अपरिहार्य है।
Published: May 7, 2026