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2024 में बाल अपराध 6 % बढ़े, पीओसीएसओ मामले 69 000 से पार
राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने अपने नवीनतम आंकड़ों में बताया कि 2024 में बाल शोषण‑सम्बंधी अपराध पिछले वर्ष की तुलना में 6 % बढ़े हैं। इस वृद्धि के साथ, वर्ष भर में 69 000 से अधिक मामलों में बाल संरक्षण (पीओसीएसओ) कानून लागू किया गया, जो प्रतिकूल प्रवृत्ति को स्पष्ट तौर पर उजागर करता है।
यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि देश भर में छोटे‑छोटे चेहरों पर गहरी जड़ें जमा रही हिंसा का प्रतिबिंब है। 2023 में लगभग 65 000 पीओसीएसओ मामले दर्ज हुए थे; 2024 में यह संख्या 69 000 को पार कर गई, जबकि जनसंख्या में इस अवधि में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई।
प्रमुख कारणों में पुलिस की रिपोर्टिंग में सुधार, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की बढ़ती पहुँच, तथा सामाजिक मीडिया द्वारा जागरूकता का प्रसार शामिल है, परन्तु यही कारण अक्सर प्रशासनिक जवाबदेही के प्रश्न को नहीं बढ़ाते। कई राज्यों में बाल कल्याण बोर्ड (BWC) की कार्यशैली अभी भी नियम‑पुस्तक से अधिक कागज़ी कामकाज तक सीमित है, जिससे मामलों का निपटारा अत्यधिक धीमा रह जाता है।
वर्तमान नीति‑परिदृश्य में, ‘बाल संरक्षण’ शब्द को मंत्रियों की भाषण सभा में बख़ूबी सजाया जाता है, परन्तु जमीन पर इस शब्द को लागू करने की ढाँचा कमजोर दिखता है। कई रिपोर्टों में यह उल्लेख है कि पीओसीएसओ अधिनियम के तहत दण्ड की सीमा भले ही कड़ी हो, पर आरोपियों को तुरन्त न्यायालय में लाना, जाँच के लिये विशेष टीम बनाना, और पीड़ित‑परिवार को मनोवैज्ञानिक सहायता देना—इनमें से अधिकांश कदम अभी भी अधूरे हैं।
राज्य सरकारों का उत्तर अक्सर ‘आंतरिक कार्रवाई चल रही है’ तक सीमित रहता है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सुधार के कई प्रस्ताव शुरू ही नहीं हुए। कम संसाधन‑संपन्न जिलों में पीओसीएसओ इकाई की अनुपस्थिति और पुलिस स्टेशन में प्रशिक्षित आवश्यक कर्मियों की कमी, इस सन्देश को दोहराती है कि संस्थागत सुस्ती न केवल मौजूदा अपराध को बढ़ावा देती है, बल्कि भविष्य के पीड़ितों के लिए भी जोखिम का द्वार खोल देती है।
नीति‑निर्माताओं को अब साक्ष्य‑आधारित उपाय अपनाने की आवश्यकता है: तेज़ प्रोसेसिंग टाइमलाइन, 24‑घंटे हॉटलाइन की बुनियादी सुदृढ़ीकरण, और विशेषीकृत फॉरेंसिक इकाइयों का गठन। साथ ही, बाल कल्याण बोर्ड को नॉन‑पेरोल आधार पर सशक्त बनाकर न्यायिक निरीक्षण में वृद्धि करनी चाहिए, ताकि ‘रिपोर्टिंग’ से ‘रिपोर्टिंग‑पर‑कार्रवाई’ तक का अंतर कम हो।
सारांशतः, 2024 में बाल अपराध में देखी गई 6 % की वृद्धि, केवल आँकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि प्रशासनिक उत्तरदायित्व की झलक है। जब तक नीतिगत ढाँचे में ठोस कार्यविधि, फासलेदार निरीक्षण तंत्र, और व्यापक सार्वजनिक‑निजी साझेदारी नहीं होगी, तब तक इस alarming प्रवृत्ति को उलटना संभावित नहीं लग रहा।
Published: May 8, 2026