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2024 में 10,312 लोगों को पशु क्रूरता के आरोप में गिरफ्तार, एनसीआरबी ने पहली बार डेटा संकलित किया
राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने इस वर्ष पहली बार सम्पूर्ण भारत में पशु क्रूरता के आँकड़े प्रकाशित किए हैं। 2024 में कुल 9,039 शिकायतें दर्ज हुईं और 10,312 व्यक्तियों को इस अपराध में हिरासत में लिया गया। आँकड़े से स्पष्ट हो रहा है कि पिछले वर्षों में इस मुद्दे का कोई औपचारिक ट्रैक नहीं रखा गया था, जिससे नीतिगत विरलता और प्रशासनिक सतर्कता की कमी की एक झलक मिलती है।
राज्यस्तर पर महाराष्ट्र ने सबसे अधिक मामलों की रिपोर्ट दी है। जबकि यह आंकड़ा राज्य की तीव्र प्रतिबद्धता को दर्शा भी सकता है, यह यह भी संकेत देता है कि उसके बाहर के कई क्षेत्रों में शिकायतें न तो दर्ज होती हैं, न ही ठीक से जांची जाती हैं। इस असमानता को देखते हुए यह प्रश्न उठता है कि क्या राष्ट्रीय रूप से लागू नियम—जैसे 1992 का पशु संरक्षण अधिनियम—वास्तव में लागू हो रहे हैं या केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित रह गए हैं।
पशु कल्याण बोर्ड, राज्य वन्यजीव विभाग और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय की कमी इस परिणाम में स्पष्ट है। कई मामलों में पुलिस ने प्राथमिक शिकायत को नोटिस में बदल दिया, जबकि कोई ठोस कारवाई नहीं हुई। ऐसी स्थितियों में “डाटा उपलब्ध है, पर कार्रवाई नहीं” का नारा सुनाई देता है, जो प्रशासनिक जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।
केंद्रीय सरकार ने पशु क्रूरता को दंडनीय बनाने के लिये 2022 में कुछ फ़ैसले जारी किए थे, परंतु औपचारिक रिकॉर्डिंग के अभाव से नीति‑निर्माण में भी धुंधलापन बना रहा। अब जब आंकड़े सामने हैं, तो यह देखना बचेगा कि क्या इन आँकड़ों को नीति सुधार और कठोर दंड के लिए प्रयुक्त किया जाएगा या फिर इन्हें केवल एक संख्यात्मक रिपोर्ट के रूप में संग्रहित रख दिया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि अद्यतन निगरानी प्रणाली, डिजिटल शिकायत पंजीकरण और विशेष प्रशिक्षित इकाइयों की स्थापना से ही इस क्षेत्र में ठोस बदलाव संभव है। वर्तमान में, जहाँ 10,000 से अधिक गिरफ्तारियों का आंकड़ा दिखाता है कि अपराधी पकड़े जा रहे हैं, वहीं यह सवाल बना रहता है कि कितनी बार वे सज़ा के रूप में सामाजिक संदेश प्राप्त करने में सफल होते हैं। एक संख्यात्मक उपलब्धि के पीछे छिपा हुए उत्तरदायित्व की कमी, नीति‑निर्माताओं को अपने कार्य‑प्रणाली पर पुनर्विचार करने का अवसर देती है।
Published: May 8, 2026