बिहार में १४ वर्षीय लड़की के बलात्कार में दो सहयोगियों द्वारा निगरानी, पुलिस ने कई कार्रवाई की
पिछली रात एक ग्राम क्षेत्र में १४ साल की नाबालिग लड़की पर बलात्कार का मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपित युवक ने पीड़िता के मुंह व हाथ‑पैर बाँध कर यौन अत्याचार किया, जबकि उसके दो सहयोगी संलग्न घटनास्थल की निगरानी कर रहे थे। ऐसा बताया गया है कि पीड़िता के परिवार ने रात में खोजबीन की, परन्तु उसे नहीं ढूँढ सके। अगले दिन सुबह खोज जारी रखने पर लड़की को मकई के खेत में मृत पायी गई।
परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने स्थानीय सूचना संग्रहीत कर त्रुटियों की जाँच के साथ ही तीन परिचितों को नाबालिग के यौन अपराध के संबंध में हिरासत में ले लिया। आरोपियों पर बलात्कार, दुरुपयोग, दुर्व्यवहार तथा हत्या के घटित अंश के आधार पर राष्ट्रीय आपराधिक अनुसंधान एजेंट (आरआरएसटी) दल को भेजा गया है। आगे के परिभाषा हेतु तिलक प्रश्नावली एवं फॉरेंसिक परीक्षण जारी हैं।
विधिक प्रक्रिया के दृष्टिकोण से अधिवक्ता सिमरनजीत सिंह सिद्धू ने कहा है कि ऐसे मामलों में प्रथम सूचना मिलने पर आरआरएसटी को तुरंत दर्ज कर, अभियुक्तों को जमानत हेतु आवेदन करने से रोकना व शारीरिक एवं मानसिक टाउनशिकाओं के लिए विशेष संरक्षण देना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अभियोजन प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र ही अदालती कार्यवाही की शुरुआत होनी चाहिए।
पुलिस ने यह भी सूचित किया कि मौजूदा जांच के तहत घटनास्थल की फोटोग्राफ़िक दस्तावेजीकरण, गवाहों के बयान और मोबाइल डेटा विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के प्रारंभिक चरण में दो सहयोगियों ने पीड़िता की स्थिति को नियंत्रित रखने के इरादे से निगरानी की थी, यह तथ्य सामने आया है। इस संदर्भ में पुलिस ने सभी संभावित साक्ष्यों को संरक्षित कर, न्यायिक प्रक्रिया के सम्मन में प्रस्तुत करने का वचन दिया है।
वर्तमान में मामले को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया है और अभियुक्तों के विरुद्ध बंधक व सीमित जमानत के आवेदन पर न्यायालय ने संदेहजनक स्थिति को देखते हुए अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर कड़ी निंदा की है और महिलाओं एवं बाल-शोषण के विरुद्ध कड़े कानूनों के प्रवर्तन की मांग की है। परंतु रिपोर्टिंग में यह स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण रूप से निष्पक्ष व खुली रहे, ताकि सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
Published: May 4, 2026