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Category: अपराध

दिल्ली में युवक द्वारा मित्र पर हत्या, शरीर दो थैलों में विभाजित पाया

दिल्ली के दक्षिण‑पूर्वी भाग, निज़ामुद्दीन क्षेत्र में रविवार की रात को हुई एक घटना में पुलिस ने एक 20 वर्षीय युवक पर एक किशोरी मित्र की हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता के शरीर को दो थैलों में विभाजित कर बारापुल्ला उच्च मार्ग के नीचे नाली में फेंक दिया था।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि आरोपी, जो निज़ाम नगर का निवासी है, मंगलवार दोपहर एक नाबालिग अधिकारी के पास आया और स्वयं ही हत्या की बात कबूल कर ली। वह बताया कि उसने पीड़िता की साँस काटी और फिर शरीर को दो भागों में काट कर अलग‑अलग थैलियों में रखी। इन थैलियों को नाली में फेंकने के बाद वह पुलिस से संपर्क किया।

जांच में ज्ञात हुआ कि आरोपी ने यह संबंध लगभग 11 महीने तक बनाए रखा था। वह कहता है कि उसने पीड़िता के साथ एक बार झगड़ा किया, जब उसने पता चलाया कि वह किसी अन्य पुरुष के साथ मित्रता कर रही है। इस बात से वह नाराज़ हुआ और रविवार की शाम की घटना में क्रूर कार्य किया।

आरोपियों के खिलाफ मोहर लगाने के पश्चात्, पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बरामद सामग्री की जांच के लिए बुलाया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने कहा कि थैलियों में से एक में पीड़िता का सिर और दूसरी में निचला हिस्सा मिला। दोनों भागों को मेडिकल परीक्षण के लिये भेजा गया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कम से कम दो जाँच विभागों को शामिल किया गया है। नाली के निकट के सीसीटीवी फुटेज को भी संकलित किया गया है और संभावित गवाहों से पूछताछ चल रही है। वर्तमान में आरोपी को हिरासत में लिया गया है और आगे की गिरफ्तारी प्रक्रिया, जमानत की सम्भावना तथा न्यायिक कार्यवाही की तिथियों को निर्धारित करने हेतु न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में आपराधिक प्रक्रिया के विशेषज्ञ अधिवक्ता सिमरनजीत सिंह सिद्धू ने टिप्पणी की, "हत्याकांड में मिलने वाले शरीर के भागों को जल्दी‑जल्दी फॉरेन्सिक प्रयोगशाला में भेजना तथा विस्तृत जाँच‑प्रोटोकॉल अपनाना आवश्यक है, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की मूल्यवत्ता को स्थापित करने में मदद करता है।"

वर्तमान में मामले की सुनवाई के बाद अभियोजन पक्ष द्वारा औपचारिक आरोप पत्र दायर किया जाएगा, जबकि बचाव पक्ष अपने तर्क प्रस्तुत करेगा। न्यायिक निकाय द्वारा इस प्रकार के घातक अपराध की सख्त सजा, सामाजिक निवारण और पीड़ित के परिवार को संभावित मुआवजा प्रदान करने के प्रावधानों को भी विचार में लाया जा सकता है।

Published: May 3, 2026