हरियाणा में गैस की कमी से बिजली घाटा, संभावित ब्लैकआउट का खतरा
हर्दन के उत्तर-दक्षिणी हिस्से में स्थित हरियाणा राज्य ने इस महीने के शुरुआती दिनों में अचानक भारी बिजली घाटे की घोषणा की। स्थिति की जड़ में गैस‑आधारित पावर प्लांटों को मिलने वाली ईंधन आपूर्ति में ‘गैस क्रंच’ का असर है, जिससे राज्य के अधिकांश जनरेटर अपनी क्षमता का 30‑40 % तक ही उत्पादन कर रहे हैं।
राज्य ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में गैस की दैनिक आपूर्ति 1.8 मिलियन मानक घन मीटर (MSM) से घटकर 1.1 MSM रह गई, जबकि बिजली की मांग की प्रवृत्ति मार्च‑अप्रैल के सर्च‑सत्र में 22 GW से बढ़कर अब 24 GW तक पहुँच गई। गैस की इस कमी का मुख्य कारण गेटवे गैस लिमिटेड (GAIL) द्वारा चल रही पाइपलाइन में रख‑रखाव, कम घरेलू उत्पादन, और केजी‑डी6 ब्लॉक से निकासी में कमी दिखा है।
इस संकट के चलते हरियाणा विद्युत वितरण कंपनी (HED) ने संभावित लोड‑शेडिंग की चेतावनी जारी कर दी है। विभाग के माननीय मंत्री, श्री रवि शरमा ने बयान दिया कि “यदि आपातकालीन उपाय तुरंत न किए जाएँ तो शाम‑शाम को दो‑तीन घंटे की व्यवधानात्मक कटौती अनिवार्य हो सकती है”। उन्होंने केंद्र सरकार से अतिरिक्त डीज़ल‑जनित जनरेटर, आयातित एलएनजी (LNG) टैंकर एवं जल‑विद्युत (हाइड्रो) सहायक शक्ति की त्वरित आपूर्ति का भी अनुरोध किया।
प्रशासन ने तत्परता दर्शाते हुए, 10 MW से 30 MW तक के मोबाइल डीज़ल जनरेटर को किराए पर लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, सौर ऊर्जा परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन की योजना को तेज किया गया है, जिसमें अगले छह महीनों में 200 MW के नई सौर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इन उपायों की लागत‑प्रभावशीलता अभी भी प्रश्न में है, क्योंकि पिछले दो वर्षों में हरियाणा ने सौर क्षमता को 85 MW से 150 MW तक लगभग दोगुना किया, जबकि गैस‑जनित शक्ति की गिरावट ने हरियाणा की ऊर्जा संतुलन को अस्थिर कर दिया है।
नीचे दर्ज नागरिक एवं व्यापारिक संस्थाओं की प्रतिक्रियाएँ भी हैं। कई छोटे‑मोटे उद्योगों ने बताया कि निरंतर लोड‑शेडिंग से उत्पादन में 15‑20 % की गिरावट आई है, जिससे दैनिक नुकसान लगभग 2.3 करोड़ रुपये है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई तालाबों का पम्पिंग समय घट गया, जिससे जल‑संकट की संभावना बढ़ी है। अस्पतालों ने आपातकालीन जनरेटर की रिटर्न टाइम को लेकर “कभी‑कभी 30 मिनट में नहीं पहुँच पाते” जैसी शिकायतें दर्ज करवाई हैं।
पर्यवेक्षणी पक्ष की टिप्पणी में यह बल दिया गया है कि उच्चतम मानक वाली ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य को “एकीकृत गैस‑आधारित और नवीनीकरणीय ऊर्जा मिश्रण” अपनाना चाहिए। जबकि सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाने का आश्वासन दिया है, विश्लेषकों ने कहा कि बिना दीर्घकालिक गैस आपूर्ति रणनीति और विविधित ऊर्जा पोर्टफोलियो के इस तरह की बार‑बार “गैस‑क्रंच” स्थितियों की पुनरावृत्ति संभव है।
अंततः, हरियाणा के प्रबंधन में ऊर्जा सुरक्षा की पुख्ता योजना की कमी स्पष्ट हो गई है। समय के साथ यह तय होगा कि प्रशासन की त्वरित राहत उपायों का प्रभाव कितना स्थायी रहेगा और क्या जनता को फिर से लंबी अवधि की लोड‑शेडिंग का सामना करना पड़ेगा।
Published: May 5, 2026