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हरियाणा में एचपीवी टीके का कवरेज दो गुना, गुड़गांव में 10% पर पहुँचा

हिंदुस्तान के उत्तर में स्थित हरियाणा राज्य ने पिछले दस दिनों में मानव पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) के टीके की कवरेज में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्यव्यापी कवरेज 6% से बढ़ कर 12% हो गया, जबकि राष्ट्रीय राजधानी के निकट स्थित गुड़गांव नगर निगम में यह प्रतिशत 10% तक पहुँच गया।

इस गति का श्रेय मुख्यतः तीन स्तम्भों को दिया गया है: सरकारी स्कूलों में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम, अस्थायी स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) की सक्रिय भागीदारी, तथा गांव-स्तरीय पंचायतों की निगरानी। इन स्वीकृत यंत्रों ने मिलकर एक संगठित ढांचा तैयार किया, जिससे टीके की उपलब्धता और जागरूकता दोनों में सुधार हुआ।

नगर प्रशासन ने इस पहल को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया, जिससे स्कूलों में टीकाकरण दिवस आयोजित किए गए और आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त इंसेन्टिव्स प्रदान किए गए। गुड़गांव नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “हमने स्कूल के घंटा‑टेबल में टीकाकरण को सम्मिलित किया, जिससे बच्चों को अतिरिक्त यात्रा की जरूरत नहीं पड़ी।”

फिर भी, आंकड़ों को देखते हुए इस सफलता का असर सीमित दिखता है। दो गुना वृद्धि आश्चर्यजनक लग सकती है, पर 12% कवरेज अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित लक्ष्य से बहुत दूर है। ऐसे में “दो गुना” की सराहना केवल आँकड़े‑खेल बन कर रह जाएगी, जब तक कि वास्तविक जनसंख्या के बड़े हिस्से को टीकाकृत नहीं किया जाता।

स्थानीय नेताओं और पंचायतों की भूमिका को सराहते हुए भी यह ध्यान देना आवश्यक है कि कई क्षेत्रों में उपलब्ध टोपियों की कमी, समय‑सीमा की लापरवाही और ट्रैकिंग सिस्टम की अपर्याप्तता ने अभियान को बाधित किया। नागरिकों ने शिकायत की कि कुछ स्कूलों में टीके की आपूर्ति अनिश्चितकाल तक रुकी रही, जबकि आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त कार्यभार के कारण फॉलो‑अप करना मुश्किल हो गया।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इस प्रकार का अर्ध‑सफल प्रयास दोधारी तलवार सिद्ध हो सकता है। एक ओर यह दिखाता है कि स्थानीय प्रशासन, स्कूल और सामुदायिक संस्थाएँ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये काम कर सकती हैं; दूसरी ओर यह उजागर करता है कि बिना पर्याप्त संसाधन और सुस्पष्ट योजना के, लाभ केवल सीमित वर्ग तक ही सीमित रह जाता है। आगे के कदमों में विभिन्न स्तरों पर डेटा‑ड्रिवन मॉनिटरिंग, फंडिंग का स्थायी प्रवाह और जन जागरूकता अभियानों को सुदृढ़ करना अनिवार्य दिखाई देता।

Published: May 7, 2026