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हरियाणा में CBI प्रश्नावली के बाद अधिकारी ने सीक्रेटेरियम की 8वीं मंजिल से कूदकर प्राण त्यागे

हरियाणा सरकार के एक अकाउंट्स अधिकारी, बालवंत सिंह, को गठित केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) के समन में आने के कुछ ही घंटों बाद, राजधानी के सीक्रेटेरियम की आठवीं मंजिल से कूदते हुए शवावस्था में पाए गए। उनका पोस्टिंग हरियर पंजाब गैस लिमिटेड (HPGCL) में थी, जहाँ वर्तमान में 593 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के मामले की जांच चल रही है।

समय की पृष्ठभूमि भी रोचक है। इस घटना के पूर्व ही HPGCL के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) को उसी धोखाधड़ी में शामिल होते हुए बर्खास्त किया गया था। अधिकारियों के क्रमिक हटने से यह स्पष्ट हो रहा है कि प्रशासकीय स्तर पर इस बड़े प्रमाणिक वित्तीय घोटाले को रोकने के लिए गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं, परन्तु इन कदमों की प्रक्रिया में मानव त्रुटियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बालवंत सिंह को CBI द्वारा बुलाने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, पर उनको “संभवतः गवाह” या “संशयित” के रूप में देखा जा रहा है। इस त्रासदी ने यह प्रश्न उठाया है कि सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक देखभाल को कितना गंभीरता से लिया जाता है। आज ही हरियाणा के कूड़े‑कचरे से लेकर हाई‑राईज़ बोरडर तक कई मामलों में कर्मचारी कल्याण के उपायों को खोखला कहा गया है; यह मामला उसी की अगली पर्ची बन गया है।

सरकार ने तुरंत एक व्यापक जांच का आदेश दिया है, जिसमें सीक्रेटेरियम के सुरक्षा मानकों, कॉल‑इन प्रक्रिया और कर्मी‑परामर्श प्रणाली की समीक्षा शामिल है। राज्य के सचिवालय के प्रशासनिक अधिकारी कहते हैं, “हम इस घटना को एक दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्तिगत त्रुटि नहीं, बल्कि संस्थागत चूक के संकेत के रूप में देखेंगे”। यह टिप्पणी न तो थी, न वह, बल्कि एक सूखी सिचुएशन-रिपोर्ट की तरह लगती है—जैसे “गाड़ी में तेल ख़त्म, फिर भी ड्राइविंग जारी”।

समुदाय में इस घटना को लेकर गहरी बेचैनी है। नागरिक संगठनों ने कहा है कि बड़े वित्तीय घोटालों की जांच के साथ‑साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना आवश्यक है, नहीं तो “जवाबदेही की टॉवर” गिरते‑गिरते स्वयं‑मरने की ओर ले जाएगी। प्रशासन का यह द्विपक्षीय दबाव—धोखाधड़ी को समाप्त करना और कर्मचारियों को सुरक्षा देना—भविष्य में अन्य सरकारी इमारतों को भी “जम्पिंग जॅक” सिमुलेशन की तरह बदल सकता है।

भले ही इस दुखद घटना का अंतिम कारण अभी भी जाँच के दायरे में है, यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और कर्मचारी‑सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उपायों की कमी ने ऐसी त्रासदी को जन्म दिया। जब तक ये मुद्दे सीधे तौर पर हल नहीं होते, “हमारी हरियाणा” का नाम केवल आँकड़े भर नहीं, बल्कि इंसानों की काबिलियत को भी दर्शाएगा।

Published: May 5, 2026