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हरियाणा के स्कूलों में आठ देशों की टीम ने FLN मॉडल की जाँच की
नई दिल्ली – राज्य के शिक्षा विभाग ने इस हफ्ते एक बहुपक्षीय टीम को अपने स्कूलों में आमंत्रित किया, ताकि ‘फ़ुल-लर्निंग नेटवर्क’ (FLN) मॉडल की प्रभावशीलता का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जा सके। इस मिशन में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक कार्यक्रम (UNESCO), OECD, यूके, यूएसए, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, फिनलैंड और जर्मनी की प्रतिनिधि टीम सम्मिलित थी। टीम ने गुरुग्राम, फरिदाबाद और पंचकुला के चुने गए स्कूलों का दौरा कर, कक्षा‑स्तर की शिक्षण‑शिक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचा और मूल्यांकन प्रक्रिया की बारीकी से जाँच‑पड़ताल की।
हिंदुस्तान में शिक्षा सुधार के कई वादे अक्सर राजनैतिक भाषणों में रह जाते हैं, पर इस बार प्रशासन ने ‘परिणाम‑उन्मुख’ शब्द को अपने मंच पर रखा। शिक्षा सचिव ने कहा, “FLN मॉडल हमारे ग्रामीण‑शहरी स्कूलों को एक समान डिजिटल कक्षा में लाने का जरिया है; अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की राय से हमें इस दिशा में ठोस कदम उठाने में मदद मिलेगी।” अतः, दिल्ली से आयी टीम ने अपने प्रथम दो दिनों में 12 शैक्षणिक संस्थानों का सर्वेक्षण किया, जिसमें प्रमुख फोकस बिंदु थे‑ शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता, छात्र‑केन्द्रित सीखने की सुविधा, और डेटा‑आधारित मूल्यांकन की विश्वसनीयता।
टीम के मुख्य मतदाता जेडी. स्मिथ (ऑस्ट्रेलिया) ने बताया, “हमें यहाँ के प्रयोगात्मक क्लासरूम सेट‑अप, इंटरेक्टिव बोर्ड और कनेक्टेड लैब्स की झलक मिली। किन्तु, बहुत सी कक्षाओं में बुनियादी इंटर्नेट कनेक्शन अभी भी अस्थिर है, जो पूरे मॉडल की विश्वसनीयता को खतरे में डाल सकता है।” इस टिप्पणी पर स्थानीय अभिभावकों ने “भ्रमित” शब्द का प्रयोग किया; कई अभिभावक ने कहा कि उनका बच्चा अभी भी कलाकृति के बोर्ड पर लिख रहा है, जबकि प्रशासन ‘डिजिटल साक्षरता’ की बात कर रहा है।
हकीकत में, कुछ स्कूलों में नई तकनीकें सफलतापूर्वक स्थापित हो रही हैं, पर कई एजी उन्नत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। एक ग्रामीण विद्यालय के प्रमुख ने कहा, “हमें तो बस पीपीएस (पहला पावर्ड सॉकेट) की कमी है, जबकि वहाँ बेनजामिन फ्रैंकलिन की तरह विचार‑उत्थान की बात चल रही है।” इस अनौपचारिक टिप्पणी में शिक्षा सुधार के प्रति असंतोष की झलक मिलती है।
आठ-देशीय टीम ने अपने निष्कर्षों को दो भागों में विभाजित किया: पहला, मॉडल के बुनियादी सिद्धांत – व्यक्तिगत सीखने के पथ, लगातार आँकड़ों द्वारा मूल्यांकन, तथा तकनीकी‑सहमती से शिक्षण – को सराहा; दूसरा, कार्यान्वयन में मौजूदा अंतर – बुनियादी बुनियादी ढाँचा, शिक्षक‑कौशल और प्रबंधन की सुदृढ़ता – को रेखांकित किया। रिपोर्ट के अनुसार, यदि इन अंतरालों को शीघ्रता से पाट दिया गया तो FLN मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर दोहराया जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने इस रिपोर्ट को “अविलंब सुधार योजना” के रूप में अपनाने का वचन दिया। उन्होंने अगले वित्तीय वर्ष के बजट में डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षक पुन: प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर मॉनिटरिंग इकाइयों की स्थापना के लिए अतिरिक्त 250 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव रखा। समीक्षकों ने फिर भी चेतावनी दी कि “बजट में इजाफा केवल कागज़ी समिति नहीं, जमीन पर कार्यान्वयन की गहरी निगरानी के बिना, वह भी सिर्फ एक और शैक्षणिक मोहर बन सकता है।”
इस पहल के प्रमुख लाभों में छात्रों के लिए गहन सीखने की सम्भावना, ग्रामीण‑शहरी शैक्षिक समानता, तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ संरेखित पाठ्यक्रम मानना जा सकता है। परन्तु, वास्तविक प्रभाव तभी साकार होगा जब प्रशासन न केवल मौजूदा ढाँचा सुधारें, बल्कि शिक्षा‑सेवा में ‘संतोषजनक रहा’ के अल्पकालिक वादे को पीछे छोड़ कर दीर्घकालिक परिणाम‑उन्मुख नीति को अपनाए।
Published: May 7, 2026