हार्डोई में 29 वर्षीय आरोपी महनूर को पुलिस की गश्त में गोली मार खून हुआ, encounter की वैधता पर सवाल
उत्तर प्रदेश के हार्डोई जिले में एक भयावह अपराध के संदिग्ध, 29 वर्ष के महनूर को पुलिस के एक जांच अभियान के दौरान गोली मारने के बाद मार दिया गया। प्रकरण के अनुसार, महनूर ने सात साल के लड़के को अपहरण कर, बलात्कार किया और फिर फिरौती के वास्ते उसकी हत्या कर दी थी; मृतक का शरीर मका के खेत में मिला।
स्थानीय पुलिस ने बताया कि महनूर ने गश्त दल पर तुरंत गोली चलाने की कोशिश की, जिसके जवाब में उन्होंने उसे आग से जवाब दिया। हालांकि, इस तरह के "तुरंत न्याय" की प्रक्रिया पर अधिकारिक जांच की मांग बढ़ी है। लोगों के बीच यह धारणा है कि पुलिस ने विस्तृत जाँच‑परिचय के बजाय भरोसा‑भरी "गश्त में गोली" को अंतिम समाधान बना लिया।
हार्डोई पुलिस कार्यालय ने इस कार्रवाई को "अपहरण‑हत्या के कुख्यात अपराधी के खिलाफ वैध" बताकर सार्वजनिक समर्थन का दावा किया। परन्तु मानवाधिकार संगठनों ने संकेत दिया कि गश्त में गोली मारने की प्रक्रिया को "रात्रि बली" कहा गया है, जहाँ ठोस सबूतों, फ़रियाद‑नोटिस या न्यायालयीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
शहर के नागरिकों पर इसका प्रभाव दोधारा बन गया है। एक ओर, अपराध के शिकार परिवार को न्याय की तेज़ी से मिली आशा महसूस हो रही है; वहीं, अन्य पक्ष में पोलिस के इस त्वरित निर्णय से संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएँ उत्पन्न हो रही हैं। स्थानीय निकाय के प्रमुखों ने कहा कि मामला पूरी तरह से जांचेगा, पर यह भी संकेत मिला कि प्रशासन को "दुर्घटना" वाले मामलों में गश्त‑उपचार को प्राथमिकता देना आसान हो रहा है।
आगे चलकर, राज्य सरकार और उच्च न्यायालय के पास इस मामले की गुप्त जांच का आदेश आया है। यदि पुलिस द्वारा सामना (encounter) को वैध बताया गया, तो यह कानून-प्रशासन के लिए एक नया मानदंड स्थापित कर सकता है; यदि नहीं, तो यह अधिक कठोर निगरानी और पारदर्शी प्रक्रियाओं की मांग को सुदृढ़ करेगा।
Published: May 6, 2026