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हामीरपुर में यमुना पर नाव डूबने से 6 लापता, 3 बचाए
उत्तरी प्रदेश के हामीरपुर जिले में यमनु नदी के एक छोटे द्वीप से लौटते समय एक भीड़भाड़ वाली लोकल नाव डूब गई। स्थानीय प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, नौका में सवार छह लोगों, जिनमें महिलाएं और छोटे‑बच्चे शामिल थे, अभी तक लापता हैं, जबकि तीन व्यक्तियों को बचा कर किनारे पर लाया गया।
डूबने के बाद तत्काल जिला बाढ़ प्रबंधन विभाग, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों ने मिलकर बचाव अभियान शुरू किया। रिस्क्यू ऑपरेशन में दो जलक्राफ्ट, एक हेलीकॉप्टर और कई स्वयंसेवक शामिल थे, परन्तु समय की कमी और तेज बहाव ने बचाव कार्य को कठिन बना दिया। प्रशासन ने बताया कि बचाए गये तीन लोगों को प्राथमिक उपचार केंद्र में पहुंचाया गया है और उनके परिवारों को तुरंत सूचना दी गई है।
घटना के मूल कारण को लेकर प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि नाव को नियोजित क्षमता से कहीं अधिक लोगों ने भरा था, और जीवनजाकेट जैसी बुनियादी सुरक्षा सामग्री की पूरी कमी थी। ऐसी नियम‑उल्लंघन के लिए स्थानीय नदी परिवहन विभाग की निगरानी की कमी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को ‘भौतिक सुरक्षा के प्रसार’ के बजाय ‘भौतिक परिवहन की अतिरेकता’ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। जमीनी स्तर पर कई लोग कह रहे हैं कि इन नावों को बिना लाइसेंस, बिना निरीक्षण के चलाना, और सुरक्षा उपकरण न देना, सार्वजनिक सुरक्षा के मूल सिद्धांतों की पूर्ण अनदेखी है।
बंद‑बस्ती के निकट बुनियादी ढाँचा अभाव, औपचारिक नौका पंजीकरण का असभ्य होना और जलमार्ग पर नियमित निरीक्षण न होना, प्रशासनिक लोचनशीलता की चुप्पी को और गहरा करता है। आलोचक तर्क देते हैं कि जब तक सरकारी अधिकारी बुनियादी “जीवन‑जाकेट” की व्यवस्था नहीं करवाते, तब तक ऐसी दुर्घटनाएँ दोहराए जाने की संभावना अधिक है।
जिला प्रशासन ने अगले दो दिनों में एक विशेष जांच टीम गठित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कठोर उपाय अपनाने का आश्वासन दिया है, परन्तु जनता का भरोसा तब तक नहीं उठेगा जब तक वास्तविक कार्यान्वयन में सुधार न दिखे।
Published: May 7, 2026