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हैदराबाद में नगर कर वृद्धि पर करदाताओं का सतत शोषण

हैदराबाद नगरपालिका ने पिछले पाँच वर्षों में विभिन्न कर‑दर में क्रमिक बढ़ोतरी की, जबकि जल, स्वच्छता और मौजूदा बुनियादी ढाँचे की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार नज़र नहीं आया। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वार्षिक कर संग्रह 18 % तक बढ़ा, जबकि आय के इरादे से किये गये विकास परियोजनाओं में 35 % से अधिक कार्य अधूरे रह गये।

नवीनीकरण कर, संपत्ति कर और नया ‘पर्यावरण योगदान’ जैसे चार्जेज को क्रमशः लागू किया गया, जिससे मध्यम वर्गीय गृहस्वामियों की जेब में हल्की थली छोड़ गई। नगर निगम के प्रमुख ने इसे "सहज वित्तीय संतुलन" बताया, परंतु नागरिक समूह ‘हैदराबाद नागरिक मंच’ ने इसे "करदाताओं के लिए निरंतर सवारी" कहा, क्योंकि अतिरिक्त आय का अधिकांश हिस्सा प्रशासकीय खर्च पर, न कि सार्वजनिक सेवा पर व्ययित हो रहा था।

पिछले महीने राज्य वित्त विभाग ने इस पर एक ऑडिट आदेशित किया। ऑडिट रिपोर्ट ने कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया—जिनमें अप्रयुक्त बजट, दोहरावदार अनुबंध और असमान कार्य वितरण शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बड़े ठेकेदारों को स्पष्ट कारण के बिना दोबारा अनुबंध दिया गया, जबकि छोटे स्थानीय ठेकेदारों को लगातार बाहर रखा गया।

इनके जवाब में नगरपालिका ने एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया और भविष्य में पारदर्शी टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाने का वादा किया। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तविक बदलाव केवल तब तक नहीं आएगा जब तक करदाताओं से दबाव नहीं बना रहता। सोशल मीडिया पर अनेक नागरिकों ने "टैक्स‑पेयर नहीं, टॅक्सी‑पेयर" जैसे व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी कर के अपनी निराशा जाहिर की।

वास्तविक परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं, परंतु वर्तमान परिदृश्य यह दर्शाता है कि वित्तीय वृद्धि और बुनियादी सेवाओं के बीच असंतुलन, प्रशासनिक चेतनता की कमी और नागरिकों के अधिकारों के प्रति उदासीनता का संकेत है। आगे देखना यही रहेगा कि क्या ऑडिट के बाद निष्पादित सुधार केवल कागज़ी घोड़े बनेंगे या वास्तव में हाइड्राबाद के रोज़मर्रा के जीवन को सुदृढ़ करेंगे।

Published: May 4, 2026