हैदराबाद में 80 लाख रुपये के डिजिटल धरापड़े धोखाधड़ी में दूसरा आरोपी गिरफ्तार
हैदराबाद पुलिस ने आज सुबह 80 लाख रुपये के अनुमानित नुकसान पहुंचाने वाले डिजिटल धरापड़े (डिज़िटल अरैस्ट) धोखे के दूसरे आरोपी को हिरासत में ले लिया। यह गिरफ्तारी हैदराबाद सायबर क्राइम सेल की बहुस्तरीय जाँच के बाद की गई, जिससे पता चला कि आरोपी ने ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके कई व्यक्तियों को फर्जी अरैस्ट नोटिस भेजे और उनसे वसूले गए रक़म का कपाट किया।
पहले आरोपी को पिछले महीने गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन उसकी गिरफ्तारी के बाद भी मामले की जटिलता बनी रही। जांचकर्ताओं ने वित्तीय लेन‑देन की फ़ॉरेंसिक समीक्षा, मोबाइल डेटा ट्रेसिंग और बैंक खातों की लगातार निगरानी के माध्यम से इस दूसरे आरोपी की पहचान की। हीसाब के अनुसार, आरोपी ने अपने स्वयं के बनवाए हुए वेबसाइट और ऐप के ज़रिये पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया कि उन्हें पुलिस द्वारा अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया है और केवल तब ही उनका केस से मुक्ति संभव होगी जब वे तत्काल भुगतान कर दें।
डिजिटल धरापड़े के शिकार मुख्यतः छोटे‑मध्यम व्यवसायी और नौकरीपेशा नागरिक थे, जिन्होंने अपने बैंक खातों से मिलियन‑मात्रा की रकम निकाली। कई पीड़ितों ने आरोप लगाया कि इस धोखाधड़ी ने न केवल उनके वित्तीय स्थायित्व को ख़तरा पहुँचाया, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के प्रति सार्वजनिक भरोसे को भी झकझोर दिया।
पुलिस ने इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल कर विस्तृत डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने दो साल से अधिक समय तक विभिन्न IP एड्रेस और वैपीएन सर्वर का उपयोग करके अपनी पहचान छुपायी रखी थी, जिससे प्रारम्भिक जाँच में बाधा उत्पन्न हुई। अब, आरोपी के साथ उसकी संपूर्ण वित्तीय संपत्ति की जप्ती भी की जा रही है, जिससे आगे के पुनःवसूली प्रक्रिया को तेज़ी मिलने की उम्मीद है।
हैदराबाद जिले के कलेक्टर ने इस घटना के बाद नागरिकों को सतर्क रहने का आह्वान किया और कहा कि प्रशासन डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ विशेष टास्क‑फोर्स स्थापित कर रहा है। वे यह भी संकेत दे रहे हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म की सत्यापन प्रक्रिया को कड़ी करने के साथ-साथ डिजिटल लेन‑देन की सीमा में संशोधन किया जाएगा।
नीतिनिर्माताओं के लिए यह एक चेतावनी है कि तकनीकी प्रगति के साथ धोखाधड़ी के स्वरूप भी जटिल होते जा रहे हैं, और प्रशासन को डिजिटल सुरक्षा के नियामक ढाँचा को समय‑समय पर पुनरावलोकित करना आवश्यक है। यह मामला प्रशासनिक उत्तरदायित्व और तकनीकी कौशल के संयोग को दर्शाता है, जहाँ न केवल जाँच एजेंसियों को बल्कि सामान्य नागरिकों को भी डिजिटल साक्षरता में वृद्धि की आवश्यकता है।
Published: May 5, 2026