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हैदराबाद पुलिस में रेप्टेशन मामला: कांस्टेबल ने वरिष्ठ अधिकारियों पर तबाही की लूट का आरोप, जांच का आदेश
हैदराबाद पुलिस के एक निचले स्तर के कांस्टेबल, अनुजीत सिंह, ने स्थानीय स्तर पर दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी—इंस्पेक्टर राकेश वर्मा और उपाध्यक्ष (रॉक) श्याम सिंह—पर मौद्रिक लूट और अनधिकृत लाभांश के आरोप लगाए हैं। कांस्टेबल का कहना है कि कई मामलों में इन वरिष्ठों ने आयुक्त के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न सार्वजनिक कार्यों के ठेकेदारों से असामान्य शुल्क वसूल किया।
कांस्टेबल ने अपने आरोप शिकायत पत्र में स्पष्ट किया कि इन लूट के कारण निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को अवैध तरीकों से रेज़्यूमे, पोस्टिंग और प्रोमोटशन हेतु रिश्वत देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह प्रथा न केवल विभागीय अनुशासन को तोड़ती है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और सेवा में देरी का कारण बनती है।
शिकायत के बाद, त्रावन जिले के पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री ए.के. शेखर ने तुरंत एक स्वतंत्र जांच टीम गठित करने का आदेश दिया। टीम में बाहरी आयुक्त, राज्य पुलिस निरीक्षक एवं एक अनुभवी वन्यजीव और अपराध विशेषज्ञ शामिल होंगे, ताकि किसी भी पक्षपात से बचा जा सके। जांच के शुरुआती चरण में शिकायत पत्र के साथ प्रस्तुत सभी दस्तावेज़, फोन रेकॉर्ड और ठेकेदारों के लेन‑देनों की जाँच की जाएगी।
इस घटना ने शहर में पुलिस प्रशासन के प्रति सार्वजनिक भरोसे को एक बार फिर चुनौती दी है। नागरिक संगठनों ने कहा कि पुलिस में भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों को समय पर सुलझाया न जाए तो लोगों का भरोसा पूरी तरह कमज़ोर हो सकता है। वहीं, पुलिस संघ ने कहा कि “कभी‑कभी व्यक्तिगत विवादों को संस्थागत मुद्दे में खींचा जाता है, पर इस बार आरोपों की गंभीरता को देखते हुए परिपूर्ण जांच आवश्यक है।”
यदि जांच के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों पर लूट सिद्ध हो जाती है, तो उनके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई, साथ ही आपराधिक अभियोजन भी संभावना बनता है। इस बीच, विश्राम के दौरान प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार, आंतरिक कार्रवाई के तंत्र को सुदृढ़ करने और पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया है।
कांस्टेबल अनुजीत सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं, बल्कि संपूर्ण पुलिस बल को स्वच्छ बनाना और जनता के साथ भरोसा पुनः स्थापित करना है। उनके इस साहसिक कदम को कई सहकर्मियों ने समर्थन दिया है, परन्तु यह भी कहा गया है कि “झटका देने से पहले सभी पक्षों को सुनना आवश्यक है, ताकि आगे की जाँच निष्पक्ष रहे।”
Published: May 8, 2026