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Category: शहर

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हाई कोर्ट पैनल ने चिह्नित किया 4 लाख लोगों को अभी भी खतरे वाले मकानों में रहने की संहारक स्थिति

नई दिल्ली के हाई कोर्ट ने एक विशेष पैनल की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया, जिसमें बताया गया है कि लगभग चार लाख (4 लाख) लोग अभी भी ऐसी इमारतों में निवास कर रहे हैं जो संरचनात्मक रूप से असुरक्षित मानी गई हैं। यह आंकड़ा पिछले साल हुई कई इमारती क्षरण घटनाओं के बाद भी बरकरार है, जिससे नगर प्रशासन की कार्यवाही पर सवाल उठते हैं।

पैनल, जिसका नेतृत्व पूर्व न्यायाधीश श्री अशोक पेरवाल कर रहे हैं, ने 2023‑2025 की अवधि के डेटा का विश्लेषण किया। उनकी जांच में पाया गया कि 1,983 बिल्डिंगों को ध्वस्त करने के लिए नोटिस जारी किया जा चुका है, पर उनमें से केवल 28% को ही वास्तविक कार्रवाई मिली है। शेष 72% में मालिक‑मुकदमेबाज़ी, पुनः निर्माण के झूठे वादे और झुग्गी‑झोपड़ियों में पुनर्वास की अनिश्चितता प्रमुख कारण रहे।

नगर निगम की तरफ से इस पर आधिकारिक टिप्पणी भी उपलब्ध कराई गई है, जिसमें कहा गया है कि सुरक्षा मानकों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित किया जा रहा है तथा कई बुनियादी ढाँचा‑सुधार परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करने का इरादा है। तथापि, पैनल ने बताया कि मौजूदा उपायों की गति और कवरेज अपर्याप्त है, जबकि प्रभावित परिवार अक्सर निवारक उपायों के अभाव में असुरक्षा और सामाजिक अस्थिरता की दुविधा में फँसे हुए हैं।

रहवासियों के जीवन पर पड़े असर को स्पष्ट किया गया है: कई परिवार ने बताया कि इमारतों में दरार, टूटे हुए सीमेंट और लीक होते छतों की वजह से दैनिक जीवन में असुविधा ही नहीं, बल्कि अचानक गिरावट की आशंका भी बना रहता है। इस मौन को तोड़ते हुए स्थानीय नागरिक समूह ने अदालत में जनता के उज्ज्वल भविष्य के लिए शीघ्र पुनर्वास, उचित निपटान और पुनरुद्धार योजना का आग्रह किया।

पैनल की सिफ़ारिशें स्पष्ट हैं: अनिवार्य रूप से असुरक्षित इमारतों को तत्काल ध्वस्त करना, प्रभावित परिवारों को मानक आवासीय इकाइयों में स्थानांतरण देना, तथा पुनः निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना। साथ ही, निर्माण अनुमति के इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग को अनिवार्य करने और नगरपालिका आयुक्त के प्रभारी एक 'सुरक्षा निगरानी टीम' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

जैसे ही शहर की जलधारा, बिजली और स्कूली सुविधाओं का विस्तार तेज़ी से हो रहा है, बुनियादी आवासीय सुरक्षा का सवाल अभी भी आधा अधूरा रह गया है। यदि नगर प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेता, तो अगले बड़े दुर्घटना की तारीख तय हो सकती है—और वह तारीख न तो न्यायालय की सुनवाई में, न ही चुनावी वादे में, बल्कि वास्तविक जीवन की त्रासदी में लिखी जाएगी।

Published: May 7, 2026