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हाई कोर्ट ने सीएस को एसआरएन अस्पताल के डॉक्टर्स की निजी प्रैक्टिस पर कार्रवाई करने का निर्देश

कुल मिलाकर, राज्य के उच्च न्यायालय ने एक साहसिक आदेश जारी किया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव (सीएस) को निर्देश दिया है कि वे एसआरएन सरकारी अस्पताल में नियुक्त डॉक्टरों द्वारा की जा रही निजी प्रैक्टिस के विरोध में त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाएँ। यह आदेश उन नीतियों के खिलाफ उठाया गया है, जिनके तहत सरकारी चिकित्सकों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा निजी क्लिनिक चलाने की अनुमति नहीं है।

पिछले कुछ महीनों में, शिकायतों की एक लंबी कतार स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों से आई थी, जिनमें यह बताया गया कि कई डॉक्टर रात‑दिवस सार्वजनिक अस्पताल में कार्यरत रहते हुए भी निजी प्रैक्टिस में संलग्न थे। इससे न केवल सरकारी अस्पतालों में रोगियों की सेवा में बाधा आई, बल्कि डॉक्टरों के वेतन तथा ओवरटाइम की गिनती में भी छेड़छाड़ का संदेह उत्पन्न हुआ।

हाई कोर्ट के इस आदेश में स्पष्ट तौर पर उल्लिखित है कि यदि सीएस कार्यालय इस बात को अनदेखा करता है, तो संस्थागत दख़ल और दंडात्मक कार्यवाही के लिए अदालत फिर से हाजिर होगी। यह वही स्थिति है, जिसमें पूर्व में कई उच्च न्यायालयों ने सरकारी स्वास्थ्य कर्मचारियों के निजी कार्यों को रोकने के लिए सख़्त कदम उठाए थे।

राज्य प्रशासन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह इस आदेश को पूर्णतया लागू करने के लिए एक विशेष समिति गठित करेगा। यह समिति डॉक्टरों के व्यक्तिगत फाइलों, उनके क्लिनिक के निकायों और वित्तीय लेन‑देनों की जांच करेगी। साथ ही, पत्रों के द्वारा डॉक्टरों को अपने निजी अभ्यास को बंद करने का अंतिम नोटिस दिया जाएगा।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो इस कदम से रोगियों को मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ में सुधार की संभावना है। यदि डॉक्टर अपने सार्वजनिक कर्तव्यों पर अधिक समय देंगे, तो अस्पताल की भीड़ घटेगी और रोगी‑डॉक्टर अनुपात बेहतर होगा। परंतु, यह भी देखा गया है कि कई बार ऐसी प्रतिबंधात्मक नीतियां लागू होते‑ही हैं, पर उनका निरंतर पालन नहीं हो पाता। इस कारण, प्रशासन को न केवल आदेश जारी करना है, बल्कि निगरानी के लिए ठोस तंत्र भी स्थापित करना होगा।

भविष्य के लिए यह सिद्धांत स्थापित हो सकता है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निजी प्रैक्टिस को रोकने के लिए केवल मौखिक नोटिस नहीं, बल्कि सख़्त निरीक्षण, नियमित रिपोर्टिंग और स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान आवश्यक हैं। यदि यह दिशा-निर्देश प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को पुनः बहाल करने में मदद मिल सकती है।

Published: May 7, 2026