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हाई कोर्ट ने राज्य को मांगी मुख्यमंत्री के निर्देश, खसाबा जाधव को पद्म पुरस्कार के लिए नई याचिका पर

मुंबई उच्च न्यायालय ने आज एक विशेष आदेश जारी किया, जिसमें राज्य सरकार को खसाबा जाधव को उत्तर भारत में प्राप्त प्रथम ओलिंपिक पदक के साक्षी के रूप में पोस्टह्युमस पद्म पुरस्कार देने की नई याचिका पर मुख्यमंत्री की राय लेने का निर्देश दिया गया। यह मांग उस दीर्घकालिक याचिका से उत्पन्न हुई है, जिसे जाधव के परिवार ने पिछले कुछ महीनों में कई बार न्यायालय में दायर किया था।

खसाबा जाधव, जो 1952 हैनलेन ओलिंपिक में कांस्य पदक जीत कर भारतीय खेल इतिहास में प्रथम पदक विजेता बने, को अभी तक किसी भी राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित नहीं किया गया है। उनके अनुयायी मानते हैं कि यह उपेक्षा राज्य की सांस्कृतिक संवेदनशीलता और खेल विकास नीति की विफलता को उजागर करती है।

न्यायालय के इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि "राज्य को इस महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री के निर्देशों का अनुसरण करना आवश्यक है", जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी गई। न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलते हैं, तो प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

राज्य सरकार का कहना है कि उनके पास कई समानुपातिक मामलों की समीक्षा चल रही है और वह सभी को उचित रूप से संबोधित करने का प्रयास कर रहे हैं। परंतु इस मामले में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि "संकल्पित सम्मान का अस्तित्व केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक मान्यता का भी प्रमाण है"।

परिणामस्वरूप, इस आदेश के बाद राज्य प्रशासन को अपने दायरों को पुनः व्यवस्थित करना पड़ेगा, ताकि मुख्यमंत्री के निर्देशों का शीघ्रता से पालन किया जा सके। इस प्रक्रिया में संभावित देरी न केवल जाधव के परिवार को निरासा करेगी, बल्कि अन्य विंटेज खेलांगनों के सम्मान हेतु चल रही याचिकाओं को भी प्रभावित कर सकती है।

अंततः, यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और नागरिकों के अधिकारों के बीच एक जटिल संतुलन पेश करता है। यदि न्यायालय की टीम ने समय पर कार्यवाही नहीं की, तो यह न केवल राज्य की विश्वसनीयता घटाएगा, बल्कि भविष्य में समानांतर याचिकाओं के लिए एक नकारात्मक उदाहरण स्थापित करेगा।

Published: May 6, 2026