हाई कोर्ट ने पिता को अभिरक्षा का स्वैच्छिक स्थानांतरण करने से रोका
एक प्रमुख हाई कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट कर दिया है कि पिता अपने बच्चे की वास्तविक अभिरक्षा (de facto custody) को किसी भी अजनबी या परिचित को अपने एकतरफा निर्णय से नहीं सौंप सकता। यह निर्णय उस स्थिति में आया जहाँ एक नगर में पिता ने अपने नाबालिग बच्चे को दूरस्थ रिश्तेदार के पास छोड़ दिया था, बिना सामाजिक कल्याण विभाग या न्यायालय की मंजूरी के।
संबंधित न्यायालय ने यह बताया कि अभिरक्षा के वास्तविक स्वरूप को बदलने के लिये केवल पारिवारिक समझौता पर्याप्त नहीं है; इसे बदलने के लिये न्यायिक आदेश अनिवार्य है। इस प्रवृत्ति को रोकने के पीछे मुख्य कारण है बच्चों के अधिकारों की रक्षा, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में जहाँ अभिरक्षा परिवर्तन से जुड़े सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दे जटिल होते हैं।
शहर की नगरपालिका ने इस फैसले को स्वागत योग्य माना है, क्योंकि यह स्थानीय प्रशासन को बाल कल्याण योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद करेगा। अब सामाजिक कार्यकर्ता, बाल सुरक्षा दल और नगरपालिका के बाल विकास अधिकारी शिकायत के बिना सीधे हस्तक्षेप कर सकेंगे, जबकि पुलिस को भी इस प्रकार के अनधिकृत स्थानांतरण की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करनी पड़ेगी।
हालांकि, यह निर्णय कुछ हद तक प्रशासनिक बोझ भी बढ़ा रहा है। अब हर अभिरक्षा परिवर्तन को न्यायालय में दर्ज करवाना होगा, जिससे कार्यपालिका को अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ेगी। इस प्रक्रिया की लंबाई को देखते हुए, परिवारों को अनावश्यक देरी और कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है—एक ऐसी विडंबना जिसे स्थानीय शासन को सुलझाना ही होगा।
व्यवहारिक रूप में, इस आदेश के कारण अभिरक्षा मामलों में सूचना प्रवाह में सुधार की अपेक्षा की जा रही है। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष शहर में 1,200 से अधिक ऐसे मामलों की सूचना प्राप्त हुई थी, जिनमें से आधे से अधिक को अनधिकृत समझौते के तहत स्थानांतरित किया गया था। अब, इन मामलों में समय पर रिपोर्टिंग और न्यायालय की भागीदारी से बाल सुरक्षा को सुदृढ़ करने की संभावना है।
सारांश में, हाई कोर्ट का यह निर्णय न केवल न्यायिक सिद्धांत को स्पष्ट करता है, बल्कि शहरी प्रशासन को भी बच्चों के अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देता है—भले ही इससे काम का बोझ थोड़ा बढ़े। इस नज़रिए से देखा जाए तो न्याय और प्रशासन दोनों को मिलकर इस नई चुनौती का सामना करना पड़ेगा, ताकि बच्चे के भविष्य में अनावश्यक व्यवधान न आए।
Published: May 4, 2026