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हाई कोर्ट ने खनन पट्टा नवीनीकरण याचिका खारिज, फर्म पर 5 लाख रुपये की लागत

एक हाई कोर्ट ने आज (9 मई 2026) स्थानीय स्तर पर चल रहे एक खनन कार्य के लिये जारी किए गए पुर्ज़ा (पट्टा) की नवीनीकरण याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया तथा उत्तरदायी कंपनी को पाँच लाख रुपये का खर्चा सौंपा। यह निर्णय कोयंबटूर जिले के वारिस गढ़ी में स्थापित क्वार्ज़ीमाइन प्रा. लिमिटेड के खिलाफ सुनवाई के बाद आया।

कंपनी ने 2019 में केंद्रीय पर्यावरणीय मंज़ूरी के तहत 12 साल की खनन अवधि के लिये पट्टा प्राप्त किया था। पट्टा की मूल समाप्ति तिथि दिसम्बर 2025 के बाद कंपनी ने अनिश्चितकालीन नवीनीकरण हेतु न्यायालय में याचिका दायर की, यह तर्क देते हुए कि स्थानीय प्रशासन ने विस्तार की प्रक्रिया में अनिच्छा दिखायी।

कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान कई दस्तावेज़ी त्रुटियों को उजागर किया। पेटेंट में निर्दिष्ट पार्यावरणीय शर्तें, विशेषकर जल निकायों के निकट खनन को रोकने वाले मानदंड, निरंतर उल्लंघन के तहत पाए गए। स्थानीय निवासी संघों और जल संरक्षण समूहों ने भी कई बार शिकायतें दर्ज करवाई थीं, परन्तु जिला अधिकारी और नगर पालिका की निगरानी अपर्याप्त रही।

हाई कोर्ट ने कहा, “कंपनी ने न केवल नियमानुसार पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया, बल्कि पुनर्नवीनीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सार्वजनिक सुनवाई की मौलिक आवश्यकता को भी नजरअंदाज़ किया। इसलिए याचिका को अस्वीकार करना न्यायसंगत है।” अतः, सिविल प्रक्रिया के तहत कंपनी पर 5 लाख रुपये की लागत का आदेश दिया गया, जिससे न्यायिक खर्चे और देरी के लिये दायित्व स्पष्ट हुआ।

इस फैसले के बाद स्थानीय प्रशासन ने कहा कि वे भविष्य में खनन लाइसेंस की जारी प्रक्रिया को सख्त निगरानी के तहत करेंगे और पर्यावरणीय मानकों की पूर्ति के लिये अतिरिक्त ऑडिट प्रक्रिया अपनाएंगे। हालांकि, नागरिक समूहों ने इस बात पर नोटिश किया कि न्यायिक दंड के बावजूद, वास्तविक पर्यावरणीय क्षति का पुनर्वास अभी भी अधूरा है और प्रभावित गाँवों के लिये जल एवं कृषि संबंधी समस्याएँ बनी हुई हैं।

विस्तृत रिपोर्टिंग के बाद स्पष्ट है कि यह मामला केवल एक कंपनी‑प्रबंधन की लापरवाही नहीं, बल्कि नियामक तंत्र की ढिलाई और स्थानीय प्रशासनिक अक्रियता का प्रतिबिंब है। भविष्य में समान विवादों से बचने के लिये, पर्यावरणीय अनुपालन के सख्त निगरानी, समय पर सार्वजनिक सुनवाई, और प्रभावित लोगों की भागीदारी को अनिवार्य माना जाना चाहिए।

Published: May 9, 2026