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हाई कोर्ट ने एएसआई को गोवा के स्मारकों के लिए ड्राफ्ट बाइलॉज़ 15 जून तक पेश करने का आदेश
मुंबई के उच्च न्यायालय ने आज एरकीयोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) को स्पष्ट समयसिमा के साथ आदेश दिया है कि वह गोवा में स्थित ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा व प्रबंधन हेतु ड्राफ्ट बाइलॉज़ 15 जून 2026 से पहले तैयार कर प्रस्तुत करे। यह निर्देश पिछले कई वर्षों में लम्बित रहने वाले संवैधानिक दायित्व को पूरा करने के लिये दिया गया है।
गोवा के बहुरंगी समुद्रतीर पर बिखरे हुए प्राचीन गिरजाघर, पुर्तगाली किले और स्थानीय समुदायों द्वारा संजोएँ गई पावन स्थलों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनकी सुरक्षा के लिये स्पष्ट नियामक ढाँचा न होने के कारण अचल संपत्ति विकास, अवैध निर्माण और पर्यटक सुविधाओं में असंगतता की शिकायतें निरंतर बढ़ती रही हैं। उच्च न्यायालय ने इस पारिस्थितिक असंतुलन को ‘ध्यान योग्य’ कहा और एएसआई को नियामक फ्रेमवर्क के ड्राफ्ट के साथ समय-सीमा का पालन करने का आदेश दिया।
एएसआई, जो राष्ट्रीय स्तर पर धरोहर संरक्षण की जिम्मेदारी संभालता है, ने पहले भी विभिन्न राज्यों में बाइलॉज़ तैयार किए हैं, परन्तु गोवा के विशिष्ट संदर्भ—जैसे समुद्री जलवायु, विदेशी निवेश द्वारा संचालित पर्यटन क्षेत्र, तथा स्थानीय बस्ती‑बुजुर्गों की सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ—को ध्यान में रखकर एक विशेष नियमावली तैयार करना आवश्यक है। इस प्रक्रिया में राज्य की अनुष्ठानिक समिति, स्थानिक महापौरालय तथा पर्यावरण विभाग को भी सलाहकारी भूमिका निभानी होगी।
स्थानीय प्रशासन ने आदेश को ‘धरोहर संरक्षण में पारदर्शिता और दक्षता लाने’ की दिशा में एक सकारात्मक कदम कहा है। हालाँकि, कई नगर नियोजन विशेषज्ञों ने संकेत दिया कि बाइलॉज़ के ड्राफ्ट का वास्तविक कार्यान्वयन ही मुख्य चुनौती रहेगा। ‘जैसे हर साल सर्दियों में कोला खत्म हो जाता है, वैसी ही अब स्मारक संरक्षण में भी ड्राफ्ट बाइलॉज़ का अभाव महसूस हो रहा है,’ एक अनुभवी शहरी नियोजनकर्ता ने व्यंग्यपूर्वक टिप्पणी की।
ड्राफ्ट बाइलॉज़ का प्रभाव न केवल संरक्षण के लिये बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। अगर स्पष्ट नियम बनते हैं, तो निवेशकों को कानूनी स्पष्टता मिलती है, जो दीर्घकालिक पर्यटन के लिए स्थिर वातावरण तैयार कर सकती है। दूसरी ओर, यदि नियामक ढाँचा अस्पष्ट रहेगा तो स्थानीय कारीगरों व छोटे व्यवसायी अनावश्यक बोझ उठाने के जोखिम में रहेंगे।
हाई कोर्ट का यह आदेश, यदि समय पर कार्यान्वित हो, तो गोवा के विलक्षण धरोहरों को विकास के अंधेरे में खोने से बचा सकता है। परन्तु इस परिप्रेक्ष्य में यह देखना बाकी है कि एएसआई और राज्य सरकार नियामक प्रक्रियाओं को कितनी तेजी और पारदर्शिता से आगे बढ़ाते हैं, जिससे नागरिकों की उम्मीदें केवल कागज़ी आदेशों में नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस बदलाव में बदलें।
Published: May 7, 2026