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Category: शहर

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हाई कोर्ट ने अवैध होर्डिंग्स पर नगरीय अधिकारियों की असक्रियता को प्रश्नांकित किया, जवाबदेही का आह्वान

नई दिल्ली के उच्च न्यायालय ने आज निर्धारित सार्वजनिक सुनवाई में कई नागरिक समूहों द्वारा दायर याचिका पर विचार करते हुए, शहर में अनधिकृत विज्ञापन बोर्डों के लगातार बढ़ते श्रृंखला को रोकने में नगर निगम की लापरवाहियों को गंभीरता से उजागर किया। अदालत ने प्रत्येक संबंधित निकाय से तत्काल कार्यवाही की माँग की और विस्तृत जवाबदेही रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

आरोपकर्ता समूहों का कहना है कि अनियमित रूप से स्थापित होर्डिंग्स न केवल दृश्य सौंदर्य को धूमिल कर रही हैं, बल्कि वाहन चालकों के दृष्टिकोण में बाधा उत्पन्न कर दुर्घटनाओं की दर बढ़ा रही हैं। पिछले दो वर्षों में ट्रैफिक दुर्घटनाओं में 12 % की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका अधिकांश कारण रोड साइड विज्ञापनों के अतिरेक को माना जा रहा है।

नगर निगम ने पिछले तीन वर्षों में 450 हजार वर्ग मीटर में स्थापित अस्वीकृत होर्डिंग्स की रिपोर्ट की थी, परंतु लागू आदेशों के बावजूद केवल 30 % ही हटाए जा सके हैं। कई मामलों में, अधिकारिक कारणों के बजाय “वित्तीय बाधाएँ” और “नियुक्त कर्मचारियों की कमी” को सुविधाजनक बहाना बनाया गया। न्यायालय ने इस तर्क को “सामरिक असफलता” के रूप में परखा, जो आम जन जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

हाई कोर्ट ने वारंट जारी कर सभी नगरीय अधिकारियों को अगले दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्य योजना, हटाने की प्रगति और वित्तीय स्रोतों की जानकारी जमा करने का आदेश दिया। इस योजना में निर्धारित समय सीमा के भीतर शेष 70 % होर्डिंग्स के निराकरण के लिये स्पष्ट मापदण्ड और निगरानी प्रोटोकॉल शामिल होना अनिवार्य है।

यदि निर्दिष्ट समय में अनुपालन नहीं होता, तो न्यायालय ने “अवमानना” के आरोप से सख्त शासकीय कार्रवाई, जिसमें आर्थिक दंड और अधिकारीयों की अस्थायी हटाव की सम्भावना शामिल है, का संकेत दिया। यह कदम नगर प्रशासन पर “जवाबदेही” का दबाव बनाने के साथ-साथ अनुपालन न करने पर वास्तविक परिणाम सुनिश्चित करने के लिये उठाया गया है।

शहर के नागरिकों ने इस फैसले का स्वागत किया, परन्तु यह भी चेतावनी दी कि अब तक का “संकल्प” औपचारिक दस्तावेज़ों में ही सीमित रह गया था। वे उम्मीद करते हैं कि इस बार न्यायालय के आदेश के बाद वास्तविक कार्यवाही शुरू होगी, ताकि शहरी प्रबंधन में ‘फैशन’ नहीं, बल्कि ‘फायदा’ ही प्रमुख हो।

Published: May 6, 2026