हाई कोर्ट की जाँच में शंकर नगर का अंधेरा नाइटलाइफ़
जिला हाई कोर्ट ने शंकर नगर के कुछ अंधेरे गलियों में चल रहे अवैध नाइटलाइफ़ को लेकर विशेष निरीक्षण का आदेश दिया है। पिछले दो महीनों में इस वार्ड में अनलाइसेंस क्लब, माइटेड बार और लाउंज के संचालन से उत्पन्न शोर, धुंआ, औषधीय दुरुपयोग और सार्वजनिक सुरक्षा के उल्लंघन स्थानीय निवासियों में असंतोष का कारण बन रहे हैं।
नगर निगम की ओर से 15 अप्रैल को शंकर नगर वार्ड के दुर्ता कार्यालय ने निर्धारित नियमों के उल्लंघन के संबंध में पुलिस को सूचना दी थी। उस सूचना के बाद पुलिस ने दो राउंड में सात स्थानों पर छापेमारी की, परंतु अधिकांश ठिकानों पर ‘अस्थायी बंद’ की अनुमति मिलने के बाद कार्यवाही जारी रखी गई। इस बीच, स्थानीय ब्रांडों के प्रमोटर ने कानूनी छिद्रों का फायदा उठाकर ध्वनि मानकों को टालते हुए रात 2 बजे तक धूमधाम बरकरार रखी।
हाई कोर्ट ने इस संदर्भ में यह स्पष्ट किया कि नृत्य‑हॉल, शराब के सर्वर और धूम्रपान वाले क्षेत्रों का संचालन ग्राउंड‑लेवल नगर विकास योजना के विरुद्ध है। कोर्ट ने नगरपालिका को तत्काल ‘नोइज़ एंटी‑सेंसर’ उपाय लागू करने, ध्वनि स्तर को 70 डेसिबल से अधिक न होने देने और जनसंदेहपूर्ण कार्रवाई के लिए एक दौर में प्रोड्यूसर लाइसेंस की वैधता की जाँच करने का निर्देश दिया।
नागरिक प्रतिनिधि शिवानी प्रसाद, जो शंकर नगर के पूर्व सैलानियों की संगठित आवाज़ हैं, ने कहा कि “रात के समय ध्वनि प्रदूषण ने हमारे बिस्तर, बच्चों की पढ़ाई और वृद्धावस्था के लोगों की नींद पर सीधा असर डाला है। हमें अब कोर्ट के आदेश का इंतजार नहीं, बल्कि तत्काल कार्यवाही चाहिए।” इस बयान पर शहरी प्रशासन ने कहा कि “प्रमुख बिंदु पर निगरानी कैमरों की तैनाती, मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन और अतिरेक पर जुर्माना लागू करने के लिए एक विशेष इकाई गठित की जा रही है।”
न्यायिक प्रक्रिया को देखते हुए, अगली सुनवाई में कोर्ट ने नगरपालिका, पुलिस और आयुर्वेदिक अभिभावकों को एक साथ लाकर ‘निर्देशानुसार कार्यान्वयन की रिपोर्ट’ प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यदि नाइटलाइफ़ के अवैध संचालकों को सजा नहीं मिली तो नागरिकों को आगे के नुकसान से बचाने के लिए ‘स्थायी बंदी’ का प्रावधान भी लागू किया जा सकता है।
अंततः यह मामला स्थानीय प्रशासन, पुलिस और न्यायालय के बीच सहयोग की कसौटी बन गया है—ध्यान देने वाली बात यह है कि “विकास” शब्द के पीछे अक्सर अनजाने में लोगों की नींद और सुरक्षित माहौल की कीमत चुकानी पड़ती है।
Published: May 5, 2026