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सतना में एमजीएनआरइगा कर्मचारियों ने वेतन बकाया को लेकर काम से आंदोलन शुरू किया

मध्यप्रदेश के सतना जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरइगा) के तहत नियुक्त कर्मचारियों ने पाँच महीने से अधिक बकाया वेतन के कारण काम से हड़ताल कर ली है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, वेतन के भुगतान में अनियमितताओं के कारण कई कारीगरों को मौजूदा मजदूरी से न्यूनतम दो-तीन महीने पहले तक जीवनयापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।

स्थानीय पीडब्ल्यूडी (सार्वजनिक कार्य विभाग) अधिकारियों ने कहा कि बकाया राशि राज्य की वित्तीय असंतुलन और केंद्र से आवंटित कोटा में देरी के कारण है। उन्होंने अगले दो हफ्तों में पूरी राशि का निपटान करने का आश्वासन दिया, पर फिर भी कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने और संभावित बड़े प्रतिरोध का संकेत दिया है।

हड़ताल के कारण गांवों में कई निर्माण कार्य—सड़क सुधार, जलसंरक्षण, तथा उज्ज्वलीकरण परियोजनाएं—रोक दी गई हैं। इससे न केवल रोजगार की अस्थायी कमी हुई है, बल्कि ग्रामीण स्थायी बुनियादी ढांचे की प्रगति भी बाधित हुई है। किसान और गृहस्थ सोशल माध्यमों पर इस अतिरेक की गंभीरता को लेकर चर्चा कर रहे हैं, जबकि प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

जिला पार्षदों और स्थानीय सांसद ने इस मुद्दे पर बैठक का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि एमजीएनआरइगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आय सुरक्षा है, और बकाया वेतन जैसी त्रुटियां इस उद्देश्य को धूमिल कर देती हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को तुरंत यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि बकाया भुगतान तेज़ी से हो और काम पर पुनरारंभ सुनिश्चित किया जाए।

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की वित्तीय अड़चनें, यदि समय पर नहीं सुलझाई गईं, तो राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती हैं। वर्तमान में, कर्मचारी वर्ग का हड़ताल जारी रहने की संभावना है, जो सतना जिले की विकास योजनाओं को और अधिक जटिल बना देगी।

Published: May 8, 2026