जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

सूरत ने राज्य स्तर पर कक्षा 12 बोर्ड में A1 ग्रेड से मजबूती दिखाई

गुजरात राज्य बोर्ड की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, सूरत ने इस साल कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में सर्वाधिक A1 ग्रेड प्राप्त कर राज्य में प्रथम स्थान अपनी ही कलाई पर रख लिया। कुल 1,26,378 छात्रों के बीच सूरत के विद्यार्थियों ने 48,567 A1 ग्रेड हासिल किए, जो राज्य औसत 22,346 से अधिक दोगुना है।

शहर के शैक्षिक प्रबंधन विभाग ने परिणाम को "सुरक्षित शहरी शिक्षा कार्यप्रणाली" का प्रमाण बताया, और कहा कि विशेषीकृत शिक्षक प्रशिक्षण, नई डिजिटल लाइब्रेरी और विस्तृत परीक्षा तैयारी केंद्रों ने इस उपलब्धि में मुख्य भूमिका निभाई। हालांकि, इस प्रशंसा के पीछे थोड़ा सा व्यंग्यात्मक प्रश्न भी छिपा है: जब ग्रामीण जिलों में बुनियादी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तब शहरी केंद्रों को क्यों विशेष देखभाल में रखा गया?

सूरत नगर निगम के शिक्षा अधिकारी राजेंद्र चावला ने कहा, "हमारे छात्रों की लगन और स्कूलों की प्रशासनिक तत्परता ने इस परिणाम को संभव बनाया है। आगे भी हम शहरी‑ग्रामीण अंतर को कम करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों को तैनात करेंगे।" इस बयान में यह संकेत मिला कि भविष्य में जिस दिशा में विकास होगा, वह संभवतः केवल शहरी स्कूलों तक सीमित रहेगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधन‑अभाव अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

स्थानीय कांग्रेस नेता ने परिणाम को "पार्टियों के चुनावी वादों का एक अस्थायी उत्तर" करार दिया, यह सुझाव देते हुए कि ऐसी शैक्षिक उपलब्धियों को निरंतर बनाए रखने के लिये केवल चुनावी उत्साह पर्याप्त नहीं है। वहीं, माता‑पिता समूहों ने अपने बच्चों पर बढ़ते दबाव और “ग्रेड‑केवल” शिक्षा के जोखिम को लेकर चिंता जताई।

शिक्षा विशेषज्ञों का मत है कि सूरत की इस सफलता में तकनीकी सहायता, निजी ट्यूशन संस्थानों की भागीदारी और उच्च आर्थिक शक्ति का योगदान रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बिना व्यापक नीति‑परिवर्तन के यह सफलता केवल एक “संकट‑प्रतिसाद” बन कर रह सकती है, न कि शैक्षिक सुधार की सतत प्रवृत्ति।

इस परिणाम के बाद राज्य शिक्षा विभाग ने सूरत को मॉडल क्षेत्र घोषित कर, अन्य जिलों को समान शैक्षिक ढांचा अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रस्ताव रखा है। क्या यह प्रस्ताव व्यावहारिक बन पाएगा, यह अगले वित्तीय वर्ष के बजट और शहरी‑ग्रामीण समानता के प्रति राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।

Published: May 5, 2026