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सुरक्षा के विकल्पों पर नागरिकों के विचार: ग्रिल बनाम स्मार्ट लॉक

राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जयपुर में दरवाजे और खिड़कियों की सुरक्षा के सवाल ने पिछले दो महीनों में तेज़ लहर पकड़ी है। शहर के पुराने व्‍हॉइस‑टैम्परिंग इलाके में चोरी के मामलों में 28 % की बढ़ोतरी की पुष्टि पुलिस ने की, जबकि नई सीमित‑आर्थिक वर्गों में चोरी के प्रति सतर्कता कम नहीं दिखी। इस प्रवृत्ति के जवाब में जयपुर नगर निगम ने 15 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें सभी आवासीय इकाइयों को दो साल में कम से कम एक दृढ़ ग्रिल स्थापित करने की सलाह दी गई।

नगर निगम की इस सलाह पर कई गृहस्वामियों ने विरोध किया, क्योंकि ग्रिल न केवल घर की सौंदर्य में बाधा डालते हैं, बल्कि आग या आपात स्थितियों में निकास मार्ग को भी बंद कर सकते हैं। जयपुर के प्रचलित हेरिटेज‑संकुल में स्थित नागरिक गुप्त आश्रम के अध्यक्ष रामलाल शर्मा ने कहा, “हमारी विरासत की इमारतें पहले से ही देखते‑सुनते हैं, लेकिन एक भरोसेमंद ग्रिल उन्हें एक कच्चे जिम में बदल देगा।”

वहीं, शहर की पुलिस विभाग ने सुरक्षा तकनीक के पक्ष में एक वैकल्पिक सिफारिश जारी की। पुलिस मुख्यालय ने कहा कि स्मार्ट लॉक, जो बायो‑मेट्रिक, RFID और मोबाइल एप‑आधारित प्रमाणिकरण का उपयोग करते हैं, वह चोरी‑रोधी उपायों में आधुनिकता लाते हैं। “इन्हें इंस्टॉल करने में अधिक खर्च तो है, पर बिजली कटौती या चाबियों के खो जाने की समस्या नहीं रहती,” पुलिस प्रमुख अजय भाटिया ने बताया।

प्रत्येक समाधान के अपने‑अपने नुक्सान हैं। स्मार्ट लॉक को लगातार बैटरी या अपर्याप्त विद्युत आपूर्ति की जरूरत पड़ती है, जो जयपुर की मौसमी पावर कट की समस्या के साथ टकरा सकता है। दूसरी ओर, ग्रिल स्थापित करने की लागत औसतन ₹4,500 से ₹7,000 प्रति वर्ग फुट बताई जा रही है, जो मध्यम आय वर्ग के लिए ‘हर महीने दो महीने की किराए की कीमत’ बनती है।

निवासियों के एक सर्वेक्षण में, 57 % ने कहा कि वे ग्रिल की जगह ‘रिमोट‑कंट्रोल्ड लॉक और अलार्म’ को प्राथमिकता देंगे, जबकि 38 % ने कहा कि “भौतिक बाधा ही सबसे भरोसेमंद” है। शेष 5 % ने दोनों को मिलाकर “हाइब्रिड सुरक्षा मॉडल” की माँग की।

नगर निगम ने इस बहस को देखते हुए अगले वित्तीय वर्ष में ‘निम्न‑आय वाले परिवारों के लिए ग्रिल सब्सिडी योजना’ तथा ‘स्मार्ट लॉक पर 30 % के कम टैक्‍स रियायत’ की घोषणा की है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस दो‑धारी नीति में एक स्पष्ट प्राथमिकता नहीं होने के कारण “सुरक्षा का झुंड‑सवार” समाधान बन सकता है, जहाँ अनावश्यक खर्च और अधूरी सुरक्षा दोनों ही मौजूद रहेंगे।

अंततः, जयपुर के नागरिक अभी अपनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं: ऐतिहासिक वास्तुशिल्प को संरक्षित करते हुए, पत्थर‑कंक्रीट की ग्रिल या डिजिटल लॉक के बीच संतुलन साधने की कोशिश। जैसा कि शहर के एक वरिष्ठ गृहस्वामी ने विडियो‑साक्षात्कार में कहा, “सुरक्षा तो जरूरी है, पर हमें यह तय करना होगा कि हम अपने घर की कीमत को किस कीमत पर रख रहे हैं।”

Published: May 5, 2026