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Category: शहर

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संबहर झील के किनारे प्रस्तावित सौर उर्जा परियोजना पर पर्यावरण समूहों ने जताया जोखिम

राजस्थान सरकार ने राज्य के सबसे बड़े नमकीन जलाशय, संगमरमर‑सदृश संबहर झील के निकट 1,500 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा पार्क के लिये भूमि खोजनें शुरू कर दी हैं। नियोजित क्षेत्र लगभग 1,600 हेक्टेयर को कवर करेगा और इसका मुख्य उद्देश्य 2030 तक राष्ट्रीय नवीकरणीय लक्ष्य में योगदान देना बताया गया है।

परंतु इस परियोजना को लेकर रजस्थानी नेचर कंज़र्वेशन सोसाइटी (RNCS) और WWF‑India सहित कई पर्यावरणीय संगठनों ने औपचारिक आपत्ति दर्ज करवाई है। समूहों का कहना है कि सौर पैनल की विस्तृत गठितियों से जल में मौजूदा लवणता में परिवर्तन, झील के अद्वितीय जलजीवन और विशेष रूप से प्रवासी फ्लेमिंगो एवं अन्य जलपक्षियों के प्रजनन स्थल में बाधा उत्पन्न होगी।

समूहों ने यह भी उजागर किया कि निकटवर्ती ग्रामीण बस्तियों की आजीविका मुख्यतः जाल विहार और खनिजीय नमकीन पानी की वैध निकासी पर निर्भर करती है। सौर फॉर्मेशन के बाद जल प्रवाह के बदलाव से इन समुदायों के पारंपरिक शोषण‑शक्तियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, ऐसा उनका अनुमान है।

इन आपत्तियों पर राज्य जल संसाधन विभाग ने कहा कि पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) का पूर्ण अध्ययन अभी प्रारम्भिक चरण में है और सार्वजनिक सुनवाई के लिये निर्धारित तारीख अभी तय नहीं हुई। हालांकि, जिला अधिकारी ने बताया कि जोधपुर‑जोधपुरा जल-अधिदेश ने प्रारम्भिक तौर पर “सौर ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाना” को प्राथमिकता दी है और इसलिए अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है।

शहर प्रशासन की ओर से इस मसले पर कोई ठोस कदम अभी तक नहीं दिखा है। स्थानीय निकाय, जैसे कि जयपुर नगरपालिका, इस परियोजना के संभावित नगर-पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर नागरिकों से कई अनुरोध प्राप्त कर चुका है, परन्तु अभी तक कोई सार्वजनिक मंच या समाधान नहीं आया। इस देरी को लेकर सामाजिक वार्ता मंचों में “पर्यावरणीय सुरक्षा की असलियत को सुनना है या बस सूर्य की रोशनी में चमकना है” जैसी चुपचाप व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी सुनी गयी।

आगे की कार्रवाई में, यदि पर्यावरणीय रिपोर्ट में प्रमुख नकारात्मक प्रभाव सिद्ध होते हैं, तो प्रशासन को वैकल्पिक स्थानों पर पुनर्विचार करना होगा या कम प्रभाव वाले टैक्टिकल सेट‑अप अपनाने की आवश्यकता होगी। अभी के लिए, प्रशासन का रूख “सौर की किरणों से विद्युत उत्पादन में बढ़त” पर केंद्रित है, जबकि जलजीवन की “एक बूँद भी नहीं दिखती” के रूपक ने दर्शाया है कि नीति‑निर्माताओं को जमीन से सचेत रहना कितना जरूरी है।

Published: May 7, 2026