सुप्रीम कोर्ट ने यमना प्रदूषण पर कई एजेंसियों को नोटिस; समन्वय के लिए नोडल निकाय की माँग
नई दिल्ली – भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यमना नदी के तेज़ी से बढ़ते प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से कई केंद्र एवं राज्य स्तर की एजेंसियों को आधिकारिक नोटिस जारी किया। अदालत ने विशेष रूप से दिल्ली के पर्यावरण नियंत्रण विभाग, जल बोर्ड, नगर निगम तथा केंद्रीय जल नीति एजेंसी को समन्वय के अभाव को दूर करने के लिये नोडल प्राधिकारी स्थापित करने की ओर निर्देशित किया।
न्यायालय ने एक अमिकस क्यूरिया (विशेषज्ञ) को 13 मई तक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इस योजना में स्रोत‑स्तर नियंत्रण, सीवरेट्री संधारण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा जनजागरूकता अभियानों के साथ‑साथ तेज़ कार्रवाई के लिये एकीकृत निगरानी प्रणाली का विवरण अपेक्षित है।
यमना पर लगातार रिपोर्टें समाहित करती हैं कि वर्षा‑सत्र के दौरान जल की रंगत काली स्याही जैसी हो रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में जल‑संभवित रोगों की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इस क्रम में दिल्ली के सामान्य नागरिकों को न केवल पीने योग्य जल की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि अपने घरों के पास ही उपलब्ध जलस्थलों से बचते‑बचाते स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक कई बार जल‑शोधन संयंत्रों का विस्तार, नदियों के किनारे सफाई अभियानों का प्रावधान और औद्योगिक निकासों पर प्रतिबंध की घोषणा की गई, परंतु वास्तविकता में इनके कार्यान्वयन में व्यवस्थित अड़चनें सामने आईं। निरंतर जोड़े जाने वाले अभियानों के बाद भी प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट नहीं दिखाई देती, जिससे यह प्रश्न उठता है कि क्या नीतियों की योजना और उनके निष्पादन के बीच अंतःसंबंध का अभाव है।
न्यायालय का यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिये आवश्यक करारा संकेत है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ एक कानूनी चेतावनी भी है। यदि नोडल प्राधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई और अमिकस द्वारा सुझाया गया समन्वय मॉडल लागू नहीं हुआ, तो अगले सप्ताह न्यायालय और भी कड़े आदेश दे सकता है, जिसमें दंडात्मक उपाय और संभवतः प्रशासनिक कर्मियों की अस्थायी हटाव शामिल हो सकते हैं।
शहर के हलचल भरे बाजारों और उपनगरों में यह मुद्दा अब जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं से परे, रोज़मर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। जल की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने तक, दिल्ली के नागरिकों के लिये बेकार भरी पहरेदारी ही रह जाएगी।
Published: May 4, 2026