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Category: शहर

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सुनेत्रा के पदांतरण पर अभी कोई निर्णय नहीं

नगर नगरपाल कार्यालय के आधिकारिक बयानों के अनुसार, शहरी विकास विभाग की पूर्व प्रमुख सुनेत्रा शर्मा के पद खाली होने के बाद अगले उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया अभी भी टलमटला रही है। यह अंतराल सिर्फ कागजी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं, बल्कि चालू कई विकास परियोजनाओं पर भी गहरा असर डाल रहा है।

सुनेत्रा के कार्यकाल के दौरान लागू किए गए जल संरक्षण योजना, कचरा प्रबंधन सुधार और सड़कों की आधुनिकीकरण कार्यों में अब कुछ महीनों से गति रुक गई है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नई नियुक्ति के अभाव में निर्णय लेने की सत्ता अकार्यक्षम हो गई है, जिससे अनुबंध रद्द या स्थगित किए जा रहे हैं।

नगर निगम के प्रमुख ने कहा, "हम सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं, परंतु चयन समिति के गठन में अनपेक्षित देरी हुई है।" इस बयान को विपक्षी दलों ने ‘सूरज ढँके बिना काँच की चमक’ के रूप में उजागर किया, यह दर्शाते हुए कि प्रशासन की अचलता से जनता को निरंतर असुविधा झेलनी पड़ रही है।

निवासी समूहों ने भी इस स्थिति को ‘व्यवस्थापकीय भूलभुलैया’ की श्रेणी में रखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की, “जब पद की खाली जगह को भरने में महीनें लगते हैं, तो वह साफ़ है कि जिम्मेदारी का वजन नहीं समझा गया।” यह सूखा व्यंग्य दर्शाता है कि नागरिकों ने प्रशासन की सुस्ती को सहन किया है, पर अंततः उसकी अटकलबाजी उनके दैनिक जीवन में बाधा बन कर उभरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर त्वरित प्रतिस्थापन न होने से न केवल मौजूदा परियोजनाओं पर असर पड़ता है, बल्कि भविष्य की योजना एवं बजट आवंटन में भी अनिश्चितता उत्पन्न होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि चयन प्रक्रिया को सरल बनाकर समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि प्रशासनिक ठहराव समाप्त हो और सेवाओं की निरंतरता बनी रहे।

जैसे शून्य में भी देर हो सकती है, वैसे ही निर्णय में भी देर होती है—और इस देरी का भार अंततः नागरिकों को ही उठाना पड़ता है।

Published: May 9, 2026