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सुंदर्गढ़ के दो किसान‑बालक ने कक्षा X में टॉप रैंक प्राप्त की

सुंदर्गढ़ ज़िले के एक सरकारी विद्यालय के दो छात्र—सुजित टिग्गा और सेलमोना लुगुन—ने इस साल की कक्षा X की बोर्ड परीक्षाओं में क्रमशः प्रथम और द्वितीय स्थान सुरक्षित किया। टिग्गा ने पूरे ज़िले में सबसे अधिक अंक प्राप्त कर शीर्षस्थ स्थान प्राप्त किया, जबकि लुगुन ने असाधारण अंकधारा के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। दोनों ही विद्यार्थियों के पिता किसान हैं, जो अक्सर आर्थिक तंगी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद अपने बच्चों की पढ़ाई में सक्रिय सहयोग देते रहे हैं।

उक्त स्कूल ने इस परिणाम में 25 छात्रों को ए‑1 ग्रेड दिलाने का उल्लेखनीय रिकॉर्ड स्थापित किया है, जो इस क्षेत्र के सार्वजनिक विद्यालयों के लिए दुर्लभ उपलब्धि है। स्कूल प्रशासन ने बताया कि विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा‑संकट के बीच यह सफलता, शिक्षकों की निष्ठा और कड़ी मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

छात्रों ने सफलता के श्रेय स्वयं की मजबूर पढ़ाई, शिक्षक वर्ग की निरंतर मार्गदर्शन और माता‑पिता के दैनिक प्रोत्साहन को दिया। सुजित ने बताया, "हर शाम घर पर थोड़ी देर पढ़ाई, और स्कूल में शिक्षक जी का ध्यानपूर्वक निर्देश ही मेरे लिए प्रेरणा रहे।" इसी तरह सेलमोना ने कहा, "मेरे पिता खेत में दिन का काम करने के बाद भी मेरे होमवर्क में मदद करते हैं, जो मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत है।"

इस उपलब्धि के बावजूद स्थानीय प्रशासन पर प्रश्न उठते हैं। अभी भी कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी अवसंरचना—जैसे पर्याप्त कक्षा कक्ष, उपयुक्त शौचालय, और स्थिर बिजली आपूर्ति—की कमी बनी हुई है। सुंदर्गढ़ के शैक्षिक अधिकारी कहते हैं, "हमने इस विद्यालय में अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त किए और पाठ्यक्रम सुधार कार्यक्रम चलाए, परन्तु यह कहना भी बेतुका होगा कि सब जगह यही परिस्थितियाँ हैं।" जैसा कि कहा जाता है, "डेस्क पर रखी पेंसिल तो मिलती है, पर जब तक बिजली नहीं आती, तब तक बच्चे का मन नहीं लग पाता।"

नीति निर्माताओं के लिए यह संकेत स्पष्ट है कि छोटे‑छोटे सफलताओं को निरंतरता में बदलने के लिए बुनियादी सुविधाओं में निवेश, शिक्षक प्रशिक्षण, और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन का त्वरित कार्यान्वयन आवश्यक है। केवल दो छात्रों की चमकती कहानी को पूरे जिले की शिक्षा की स्थिति का मानक नहीं बनना चाहिए; यह एक चेतावनी है कि जब तक पेंशन, नींद और पुस्तकें समान नहीं होंगी, तब तक इस प्रकार की सफलता असाधारण ही रहेगी।

Published: May 4, 2026