सिद्दार्थनगर में जल टैंक पर फँसे किशोरों को वायु सेना ने बचाया; सुरक्षा चूक पर सवाल
सिद्दार्थनगर के एक सार्वजनिक जल टैंक पर दो किशोरों को फँसते हुए देखा गया, जब टैंक तक पहुँचने के लिये उपयोग की जा रही पुरानी सीढ़ी अचानक टूट गई। इस हादसे में एक तीसरे किशोर की मौत हो गई, जबकि दुर्निवार IAF (भारतीय वायु सेना) के हेलीकॉप्टर ने बचे दो को बचाया।
आफ्टर‑हॉर्स रिपोर्ट के अनुसार, टैंक के निकट स्थित सीढ़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त थी और नियमित निरीक्षण की कमी स्पष्ट थी। जब सीढ़ी ने अपना कार्यभार खो दिया, तो किशोरों को बचाव दल के बाहर फँसा छोड़ दिया, जिससे स्थानीय प्रशासन की न्यूनतम देखभाल का प्रश्न उठता है।
स्थानीय पुलिस ने तुरंत घटना स्थल पर पहुँच कर शारीरिक सहायता प्रदान की, परन्तु टैंक की ऊँचाई और क्षतिग्रस्त संरचना के कारण शहरी बचाव उपकरण असफल रहे। इस कारण ही जिला इंटेलिजेंस ऑफिस ने भारतीय वायु सेना को सहायता के लिये बुलाया, जो अंततः हेलीकॉप्टर द्वारा जल टैंक के ऊपर लैंड कर दो किशोरों को सुरक्षित जमीन पर उतार पाई।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि नगर निकायों द्वारा बुनियादी ढाँचे – विशेषकर जल आपूर्ति टैंकों – की नियमित जाँच‑परख में लापरवाही रही है। बव्बर बर्तन पर लगाई गई सीढ़ी न केवल पुरानी थी, बल्कि उसके रख‑रखाव के लिये कोई दस्तावेज़ी प्रमाण भी उपलब्ध नहीं था। ऐसी त्रुटियाँ अक्सर छोटे‑से‑छोटे अचल संपत्तियों में छिपी रहती हैं, पर जब उनका परिणाम जान‑लेवा बन जाता है, तो जिम्मेदारी जल्द ही जनता के हाथों में आती है।
दुर्भाग्यवश, स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इस घटना पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है, जबकि जनता और मीडिया दोनों ही जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टैंकों की सुरक्षा उपायों में मानकों को पुनः स्थापित करना, नियमित तकनीकी निरीक्षण और जोखिम‑प्रबंधन के लिये एक स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाना अनिवार्य है।
हालिया घटनाओं के बाद, कई नागरिक संगठनों ने नगर निगम को तुरंत ‘सुरक्षा ऑडिट’ करने का आग्रह किया है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोका जा सके। नहीं तो, एक और सीढ़ी टूटने से अगली बार भी एक ही सीनियर अधिकारी को ही धीरे‑धीरे ‘उड़ाते’ देखा जा सकता है।
Published: May 3, 2026