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स्थानीय पुलिस अधिकारी व जावन पर टीआरबी वेतन धोखाधड़ी के आरोप

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस अधीक्षक ने दो व्यक्तियों, एक असिस्टेंट सब‑इंस्पेक्टर (एएसआई) और एक ग्रेड जावन पर त्रिपुरा रेल बोर्ड (टीआरबी) के माध्यम से अवैध वेतन प्राप्त करने का आरोप लगाया। यह मामला 2 मई 2026 को लोकोपकरण विभाग के अनियमित वित्तीय लेन‑देन के बिंदु पर उजागर हुआ, जब लेखा परीक्षकों ने इन दो अधिकारियों के वेतन रिकॉर्ड में असामान्य वृद्धि पाई।

जांच से पता चला कि एएसआई और जावन ने सरकारी तीर्थस्थल निर्माण परियोजनाओं से जुड़े टीआरबी के “अस्थायी कर्मचारी” कोटा का दुरुपयोग करके, वास्तविक कार्य में न लगे हुए कर्मचारियों के नाम पर फर्जी फॉर्म भरे। इससे कुल लगभग ₹ 12 लाख की राशि को अनुचित रूप से हस्तांतरण किया गया। यह प्रक्रिया न केवल नियमों के विरुद्ध थी बल्कि वित्तीय पारदर्शिता के सिद्धांतों को भी चुनौती देती है।

संबंधित विभाग का कहना है कि वह इस मामले को त्वरित और निष्पक्ष रूप से सुलझाने के लिये विशेष निरीक्षण टीम बना चुका है। जांच में सहयोग न करने वाले किसी भी व्यक्ति को कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। इस क्रम में, मेयर कार्यालय ने कहा है कि वो इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ शून्य‑सहिष्णुता नीति को अपनाएगा तथा भविष्य में सभी विभागीय वार्षिक रिपोर्टों की सार्वजनिक उपलब्धता को सुदृढ़ करेगा।

स्थानीय नागरिकों ने इस समाचार पर आश्चर्य व्यक्त किया। कई ने प्रशासनिक जवाबदेही की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घोटालों से सार्वजनिक निधियों का अपव्यय बढ़ता है, जबकि बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी परिपूर्ण है। सामाजिक कार्यकर्ता अनीता शर्मा ने कहा, “जाँच का परिणाम चाहे जैसा भी हो, यह आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी स्कीमा को ‘सख्त निरीक्षण’ के बिना लागू न किया जाये; वरना भरोसा तोड़ने के साथ‑साथ विकास की गति भी बाधित होगी।”

कुल मिलाकर, इस मामले ने स्थानीय शासन में वित्तीय नियंत्रण, नीति‑निर्माण और सार्वजनिक भरोसे के बीच जटिल संबंधों को फिर से उजागर किया है। प्रशासन की जल्द‑जुनून कार्रवाई और पारदर्शी संचार ही इस घोटाले के बाद नागरिकों के विश्वास को पुनः स्थापित करने की कुंजी हो सकती है।

Published: May 5, 2026