सेंट्रल रेलवे ने इगतपुरी मालघर से ऑटोमोबाइल मालवहन सेवा शुरू की
भारत की सेंट्रल रेलवे ने आज इगतपुरी मालघर से ऑटोमोबाइल मालवहन सेवा का औपचारिक उद्घाटन किया। नासिक की औद्योगिक धारा पर स्थित इस नई पहल के तहत महिंद्रा एंड महिंद्रा ने पहली बार 100 कारों का माल इगतपुरी से नौतनवा (उत्तर प्रदेश) तक रेल मार्ग से भेजा। यह कदम नासिक के वाहन निर्माताओं और डीलरों को लागत घटाने और सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इगतपुरी, जो नासिक से लगभग 80 किलोमीटर उत्तर में स्थित है, को अब कारों के बड़े पैमाने पर परिवहन का हब बनना तय किया गया है। रेल द्वारा वाहन ढुलाई से हाईवे पर बढ़ते ट्रैफिक और ईंधन की खपत पर दबाव कम होगा, जिससे पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल लॉजिस्टिक लागत को घटाएगा, बल्कि कार निर्माताओं को तेज़ और भरोसेमंद डिलीवरी भी सुनिश्चित करेगा।
नासिक जिले के प्रशासन ने इस नई सेवा को समर्थन देते हुए कहा कि पहले सड़क मार्ग से वाहन परिवहन में बढ़ती टोल, बीमा और भविष्यसूचक रखरखाव खर्चों ने उद्योगों को जकड़ दिया था। रेलमार्ग से बदलाव से ट्रक ड्राइवरों को भी कुछ राहत मिल सकती है – अब वे बस लोड को बीस प्रतिशत तक कम कर अपने खाली समय का आनंद ले सकते हैं, एक हल्की हँसी के साथ।
हालाँकि, इस तरह के लॉजिस्टिक परिवर्तन में चुनौतियों की संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। पिछले कई रेल-आधारित मालवहन परियोजनाओं में बुनियादी ढाँचे की कमी, स्टोरेज सुविधा की अयोग्य स्थिति और अंतिम चरण में सड़क कनेक्शन का ढीला होना प्रमुख अड़चन रहे हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि इगतपुरी से नौतनवा तक सीधी रेल लाइन के बाद भी कारों को अंतिम ग्राहक तक पहुंचाने के लिये पर्याप्त लास्ट‑माइल कनेक्शन की व्यवस्था होनी चाहिए, अन्यथा ट्रकों को फिर से मार्ग बदलना पड़ सकता है।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी इस पहल को निग्रानी में रखने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि फ़्रेट का शेयर रेल को दिया जाता है तो ट्रक कार्गो ऑपरेटरों के रोजगार पर असर पड़ेगा, इसलिए समन्वित नीति बनाकर दोनों मॉडलों को संतुलित करना आवश्यक है।
समग्र रूप से, इगतपुरी मालघर से शुरू हुई ऑटोमोबाइल रेलधावन सेवा नासिक के औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक नवीन समाधान प्रस्तुत करती है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रेल और सड़क दोनों के बीच सतत सहयोग एवं बुनियादी ढाँचा कैसे विकसित किया जाता है। केवल जब ये कड़ियाँ मजबूती से जुड़ेंगी, तब ही लागत‑कटौती और पर्यावरणीय लाभ के दावे वास्तविकता बनेंगे।
Published: May 3, 2026