शहर में कक्षा 12 के परिणाम: 100% पास वाले स्कूलों की संख्या बढ़ी, न्यूनतम अंक वाले छात्रों में गिरावट
प्रेसिडेंट बोर्ड ने आज जारी किए गए परिणामों के अनुसार, इस शैक्षणिक वर्ष में शहर के 78 स्कूलों में से 42 स्कूलों ने पूर्ण 100% पास प्रतिशत दर्ज किया, जो पिछले साल के 31 स्कूलों की तुलना में 35% की वृद्धि दर्शाता है। वहीँ, 40% अंक से नीचे स्कोर करने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 12.4% से घटकर 7.9% रह गया।
शहर के शिक्षा अधिकारी, डॉ. आर. कुमारी ने कहा कि “समूहिक रूप से देखें तो यह वृद्धि प्रशंसनीय है, पर यह केवल ‘सब पास’ की मात्रा नहीं, बल्कि योग्यता की गहराई को भी दर्शाए तो बेहतर होगा।” उन्होंने यह भी जोड़ते हुए बताया कि कई स्कूलों में अंक दर्ज करने के तरीके में सुधार और नई मूल्यांकन प्रणाली के प्रयोग ने इस वृद्धि को संभव किया है।
हालांकि, इस सकारात्मक आंकड़े के पीछे कुछ सूक्ष्म असंतोष छिपा है। कई निजी और सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्य ने स्वीकार किया कि “उच्च पास प्रतिशत के पीछे कभी‑कभी ग्रेडिंग की कठोरता को थोड़ा नरम किया जाता है, ताकि शीर्ष‑स्थ स्कूलों का नाम बरकरार रहे”। यही कहना कुछ अभिभावकों ने भी किया, जिन्होंने टेलीग्राम समूहों में टिप्पणी की कि “बिना वास्तविक सीख के ‘उच्च प्रतिशत’ केवल बोर्ड परीक्षा की एक रिफ़लेक्स बन गया है।”
शहर पालिका ने इस वर्ष स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 45 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया, जिसमें प्रयोगशालाओं की आधुनिकीकरण और डिजिटल कक्षाओं का विस्तार शामिल है। परंतु शिक्षा समीक्षक मानते हैं कि “इन्फ्रास्ट्रक्चर की महँगी पर्तें कुछ स्कूलों को चमकाने में मदद करती हैं, जबकि कक्षा-के-नीचे की वास्तविक शिक्षा प्रक्रिया में अभी भी बहुत खामियां हैं।”
विद्याथियों के भविष्य पर सवाल उठाते हुए, शैक्षणिक विश्लेषक सायिका वर्मा ने कहा, “जब 100% पास की दहलीज़ पर स्कूल राजेनिर्माण की दीवारें धीर-धीरे गिर रही हैं, तो वही दीवारें कक्षा के नीचे की अराजकता को छुपा रही हैं। यह स्थिति तभी सुधरेगी जब मूल्यांकन में पारदर्शिता और कठोरता दोनों का संतुलन बना रहे।”
Published: May 5, 2026