वर्षों की देरी के बाद नगर निगम ने नई कसाईख़ाना परियोजना को मंजूरी दी
नगर निगम ने आज बहु-स्तरीय चर्चा के बाद एक बड़े पैमाने पर कसाईख़ाना (अबेटोयर) निर्माण के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया। यह परियोजना प्रस्तुत करवाने से पहले लगभग पाँच साल तक विभिन्न कारणों से टलती‑टलती रही थी—भूमि अधिग्रहण में विघ्न, पर्यावरणीय मंजूरी की लंबी प्रक्रिया, तथा स्थानीय निवासियों की तेज़ी से उठती आपत्तियों।
प्रस्ताव के अनुसार, नया कसाईख़ाना शहर के दक्षिण‑पश्चिमी औद्योगिक क्षेत्रों की सीमा के पास स्थित होगा, जहाँ लगभग 150 टन मांस प्रतिदिन प्रोसेस करने की क्षमता रखी गई है। नगर निगम ने इस पर 300 करोड़ रुपये की बजट मंजूरी दी है, जिसमें आधुनिक कचरा‑निपटान प्रणाली, जल पुनरुपयोग इकाई और ध्वनि‑नियंत्रण उपाय शामिल हैं। निर्माण कार्य अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है और दो वर्षों में पूर्ण हो जाएगा।
परियोजना के पक्ष में निगम अधिकारी यह तर्क दे रहे हैं कि यह नई सुविधा पुरानी कसाईख़ानों की अपर्याप्त सुविधाओं को समाप्त कर सुरक्षित, स्वच्छ और नियमन‑अनुकूल मांस आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। साथ ही, यह शहर के मांस व्यापारियों को एकीकृत मंच प्रदान कर आर्थिक दक्षता बढ़ाएगा, ऐसा उनका दावा है।
हालांकि, स्थानीय निकाय और नागरिक समूहों ने पर्यावरणीय जोखिमों को लेकर सतर्कता व्यक्त की है। क्षेत्र के निवासी बताते हैं कि सो निर्माण स्थल के निकट दो प्रमुख जलाशयों के प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जबकि धूम्रपान एवं कचरा निपटान से वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई गई है। अभ्यासी नागरिकों ने पहले भी कई बार नगरपालिका के पिछले अधूरे वादों—जैसे कि जल‑शोश्रवण प्लांट का निलंबित रहना—को याद दिलाते हुए, इस बार स्पष्ट निरीक्षण और स्वच्छता उपायों की मांग की है।
वास्तविकता यह है कि नगरपालिका द्वारा बार‑बार विलंब की वजह से बुनियादी ढाँचे की कमी, अनुशासनहीन कार्यप्रणाली और राजनैतिक सौदेबाजी के प्रवाह का संकेत मिलता है। इस मंजूरी में एक सूक्ष्म व्यंग्य यह है कि “आखिरकार, कई सालों के वादों के बाद भी, संगठित नियोजन और पारदर्शी प्रक्रियाएँ अभी बाकी हैं”। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई कसाईख़ाना परियोजना सतही रूप से सफल हो भी जाती है, तो इसके दीर्घकालिक पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की जाँच के बिना इसकी सच्ची लागत का आकलन करना कठिन रहेगा।
नगर निगम ने कहा है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा और निगरानी दल को स्वतंत्र संस्थानों के साथ मिलाकर कार्य करने का आदेश दिया गया है। फिर भी, स्थानीय समुदाय की अपेक्षा है कि बुनियादी ढाँचा, जल‑शुद्धिकरण और कचरा‑निपटान के दायरे में वास्तविक प्रतिबद्धता दिखे, न कि केवल कागज़ी अनुमोदन।
Published: May 5, 2026