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Category: शहर

वेस्ट एशिया संघर्ष से प्लैटिनम‑आधारित कीमो ड्रग्स की आपूर्ति में तनाव, शहर के कैंसर रोगियों को असुविधा

बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय तनाव के कारण, विशेष रूप से वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष ने सक्रिय रूप से प्लैटिनम‑आधारित कीमोथेरेपी के मुख्य घटक, अर्थात् एंटी‑कैंसर ड्रग्स के सक्रिय फ़ार्मास्यूटिकल इन्ग्रेडिएंट (API) की सप्लाई को बाधित कर दिया है। इस कमी का सीधा असर हमारे शहर के प्रमुख सरकारी एवं निजी अस्पतालों में कैंसर रोगियों के उपचार शेड्यूल पर पड़ रहा है।

स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि पिछले दो महीने में ही प्लैटिनम‑संबंधी दवाओं — जैसे कार्बोप्लैटिन, सिस्प्लैटिन और ओक्सालिप्लैटिन — की स्टॉक में 30‑40 प्रतिशत गिरावट आई है। जब आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट आती है, तो अस्पतालों को अक्सर वैकल्पिक रासायनिक संयोजनों या आयातित जै वैनिला (सस्ते) दवाओं पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे उपचार की प्रभावशीलता और सुरक्षा दोनों पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है।

शहर के प्रमुख कैंसर केंद्र के प्रमुख डॉ. रवींद्र नायर ने कहा, “हमारे पास रोगियों के लिए वैकल्पिक उपचार विकल्प सीमित हैं। प्लैटिनम‑आधारित दवाएँ उन रोगियों के लिए अनिवार्य हैं जिनके ट्यूमर इस वर्ग की दवा को सबसे अधिक संवेदनशीलता दिखाते हैं। वर्तमान में हमें हर दो‑तीन हफ्ते में दो‑तीन दवाइयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस स्थिति ने कई रोगियों के उपचार को विलंबित कर दिया है, जिससे रोग की प्रगति को नियंत्रित करना कठिन हो रहा है।

प्रशासनिक रूप से, नगर स्वास्थ्य प्रमुख ने आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान को दूर करने के लिए आपातकालीन उपायों की घोषणा की है। इसमें निकटतम सीमावर्ती राज्य से वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों का उपयोग, तथा केंद्र सरकार से विशेष एक्सेस परमिट के माध्यम से आयात प्रक्रिया को तेज़ करना शामिल है। लेकिन इन कदमों की व्याख्या करते समय अधिकारी ने “बैंकों में जमा एपीआई के अभाव को देखते हुए, प्रक्रिया में समय लग सकता है” का उल्लेख किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नियोजित उपाय मात्र पर्ची‑प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि वास्तविक समय में कार्यान्वित होने में विफल रह सकते हैं।

स्थानीय नागरिक संगठनों ने इस मुद्दे को राजनीति के आँटे में फँसते देख तीखी आलोचना की है। एक स्वास्थ्य सक्रियता समूह के प्रवक्ता ने कहा, “आधारभूत दवा आपूर्ति को बाहरी संघर्षों पर निर्भर बनाना प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही है। यदि अस्पतालों के पास आवश्यक दवाओं का भंडारण नहीं है, तो यह केवल रोगियों के जीवन की कीमत पर ही सुधार हो सकता है।” उन्होंने कमियों को लेकर नीति‑निर्धारकों से तुरंत एकरूपी समाधान, जैसे दीर्घकालिक राष्ट्रीय भंडारण योजना, की मांग की।

वर्तमान में, शहर के कई कैंसर रोगी सामाजिक सहयोगियों और गैर‑सरकारी संस्थाओं के माध्यम से दवा की लागत वहन करने के अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। एक शर्मनाक परिप्रेक्ष्य में, यह दिखता है कि अंतर्राष्ट्रीय भू‑राजनीतिक उलझनों का प्रभाव स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने के साधनों तक भी फैल रहा है, जबकि सरकारी संस्थाएँ अक्सर “सिर्फ योजना बनाते हैं, कार्यान्वयन में देर” जैसी चुपचाप गूँज देती हैं।

अंत में, यह घटना न केवल प्लैटिनम‑आधारित कीमोथेरेपी की आपूर्ति पर सवाल उठाती है, बल्कि शहर के स्वास्थ्य प्रशासन की संकट‑प्रतिक्रिया क्षमता और रोगी‑केन्द्रित नीति‑निर्माण में मौजूद खामियों को भी उजागर करती है। यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो रोगियों की जीवन‑रक्षा से जुड़े निर्णयों पर व्यवधान बना रहेगा, और वह भी एक विदेशी संघर्ष के चक्रवात के कारण।

Published: May 6, 2026