विजयनगर में जलभराव रोकने के लिए नई सीवर पंपिंग स्टेशन शुरू
विजयनगर नगर निगम ने दो महीने पहले मौसमी जलभराव की समस्या को कम करने के उद्देश्य से तीन नई सीवर पम्पिंग स्टेशनों का खुलासा किया। समग्र लागत लगभग 12 करोड़ रुपये बनाकर, इस कार्य को राज्य के शहरी जल-प्रबंधन योजना के तहत लागू किया गया। पम्पिंग स्टेशन के स्थान विशेष रूप से लगातार जलस्तर बढ़ने वाले ‘बाबर गली’, ‘रायबाग’ और ‘कन्यावली’ के निचले तथा हलोण्ड में चुने गए थे।
नगर निगम के गैर-प्रमुख (विकास) विभाग के आयुक्त ने बताया कि प्रत्येक स्टेशन के लिए 2.5 मीटर/सेकंड की क्षमता वाला हाई-प्रेशर पम्प स्थापित किया गया है, जो बारिश के दौरान जल को मुख्य सीवर नेटवर्क में लौटाता है। इस पहल का लक्ष्य निचले इलाकों में खड़े पानी को 24 घंटे के भीतर साफ़ करना और सड़कों पर गाड़ी चलाने की असुविधा को समाप्त करना था।
स्थानीय नागरिकों ने शुरुआती दो हफ्तों में इस व्यवस्था को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कई निवासियों ने बताया कि अब बाजार के पास और स्कूल के निकट पानी नहीं जमा रहता, जिससे दैनिक कार्य सुगम हो गया। वहीं कुछ क्षेत्रों में अभी भी नालियों की जाम होने की समस्या अधूरी बनी हुई है, जिससे पम्प की क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। यह बात नगर निगम की तकनीकी टीम के अधिकारी ने भी स्वीकार की, कि पम्पिंग स्टेशन की पूर्ण कार्यक्षमता केवल तब ही हासिल होगी जब आउटलेट ड्रेनेज को नियमित रूप से साफ़ किया जाए।
विवेक सिंह, एक सामाजिक कार्यकर्ता, ने कहा, “सरकार ने इस मोड़ पर पम्पिंग स्टेशन लाकर अस्थायी राहत दी है, लेकिन मौजूदा जल निकासी ढाँचे में दीर्घकालिक सुधार न किए तो अगले वर्ष की बाढ़ फिर नई खबर बन जाएगी।” उन्होंने यह भी नोट किया कि पिछले तीन वर्षों में इस दिशा में केवल दो ही परियोजनाएँ पूरी हुई हैं, जबकि जलभराव की शिकायतें दरवर्षी बढ़ती जा रही हैं।
निर्णायक पक्ष से यह भी ध्यान देना आवश्यक है कि इस परियोजना की योजना बनाते समय संभावित निरंतर रखरखाव खर्च को पर्याप्त रूप से नहीं जोड़ा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पम्पिंग स्टेशनों का नियमित निरीक्षण, भागीदारों के साथ समन्वय और जल निकासी मार्गों की समय‑समय पर सफ़ाई न किए जाने पर डैम्पिंग क्षमता घटेगी और फिर से जलभराव की समस्या उत्पन्न होगी।
नगर निगम ने इस बात की पुष्टि की कि आगामी छह महीनों में अतिरिक्त दो पम्पिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है और मौजूदा प्रणाली के रखरखाव के लिए वार्षिक बजट में वृद्धि की जाएगी। बुनियादी ढाँचा मजबूत करने की दिशा में यह कदम सराहनीय है, पर यह भी स्पष्ट है कि प्रभावी जल प्रबंधन के लिए केवल बुनियादी कार्य नहीं, बल्कि निरंतर प्रशासनिक निगरानी और नागरिक सहभागिता दोनों की आवश्यकता है।
Published: May 6, 2026