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रहस्य के पर्दे में: 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व कांग्रेस मंत्री महेश जोशी की गहरी जाँच, एसीबी ने किया गिरफ्तार

राजस्थान की अनुपालन‑जाँच एजेंसी, एंटी‑कोरप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार को पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी को 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के संदर्भ में गिरफ्तार किया। एसीबी के अनुसार, जोशी ने अपने कार्यकाल में अनुचित लाभ उठाते हुए अनुबंधों को उच्च दाम पर आवंटित करंे और बदले में रिश्वत लेने का काम किया।

जल जीवन मिशन, केंद्र सरकार द्वारा 2019 में शुरू किया गया, ग्रामीण भारत में पेयजल पहुँचाने हेतु 2.5 लाख करोड़ रुपये के बजट के तहत 20 लाख से अधिक गांवों को टार्गेट करता है। इतने बड़े प्रोजेक्ट में लाल फीताश्री के बजाय लाल‑पंची की लकीरें बनाना, अभिजात्य वर्ग के लिए तो एक राजसी मज़ाक जैसा लग रहा है।

जोशी को पहले ही प्रवर्तन एजेंसी (ED) ने एक समान मामलों में धन शोधन के आरोप में हिरासत में ले लिया था। इस बार एसीबी ने उन तथ्यों को जोड़ते हुए, अनुबंधों में पारदर्शिता की कमी, नकली निविदाओं और अवैध निधि प्रवाह के संकेतों को उजागर किया। इस प्रकार एक ही व्यक्ति पर दो अलग‑अलग संस्थाओं द्वारा दो अलग‑अलग आरोपों का जड़ पकड़ना, प्रशासनिक समन्वय की प्रशंसा कर रहा है – कम से कम कागज़ी तौर पर।

एसीबी ने बताया कि जाँच के दौरान कई ठेकेदारों और खर्चे की फाइलें बरामद हुईं, जो सामान्य मूल्यांकन प्रक्रिया से पूरी तरह हटकर प्रतीत होती हैं। “रिश्वत के बदले मसाला नहीं, बल्कि अनुबंध में मिलियन‑मिलियन की कटौती की गई थी,” एक अधिकारी ने स्रोत को नहीं बताते हुए कहा।

इस विकास के परिणामस्वरूप, ग्रामीण जल सुविधाओं की गुणवत्ता और समय सीमा पर गहरी छाया पड़ गई है। कई गांव अभी भी कंकड़‑पानी की पीढ़ी में संघर्ष कर रहे हैं, जबकि राज्य ने 900 करोड़ रुपये के बड़े आंकड़े को इकट्ठा करने की घोषणा की थी। जनता के भरोसे पर इस प्रकार की घटनाएँ, जल परियोजनाओं के लिये आवश्यक निवेशकों के विश्वास को भी धूमिल कर सकती हैं।

राज्य सरकार ने कहा कि वह इस मामले में पूर्ण सहयोग देगी और आगे भी भ्रष्टाचार के किसी भी पहलू के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करेगी। हालांकि, जब तक ऐसी जाँचें चलती रहेंगी, तब तक ‘पानी की सप्लाई’ की कोई भी सार्वजनिक वादा केवल कागज़ पर ही रहने का खतरा बना रहता है।

Published: May 7, 2026