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रायसल हवाईअड्डा सुधार योजना: 2028 तक संपूर्ण नवीकरण के लिए सलाहकार चयन शुरू
बिहार ने अपने सीमा‑कीमत वाले शहर रायसल में स्थित छोटे हवाईअड्डे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बदलने का फैसला किया है। राज्य परिवहन विभाग ने आधिकारिक तौर पर सलाहकारों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी, जिससे 2028 के जून में कार्य समाप्ति का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत‑नेपाल सीमा पर माल‑बिक्री और पर्यटन के प्रवाह को तेज करना है। स्थानीय व्यापारियों ने पहले से ही इस सुधार को ‘विस्तृत बाजार की नई सर्दी’ कहा है, क्योंकि सुधारित हवाईअड्डा सीमा‑पड़ोस के छोटे‑छोटे शहरों को तेज हवाई कनेक्शन प्रदान करेगा।
परियोजना में रनवे का विस्तार, आधुनिक टर्मिनल भवन, कार्गो टर्मिनल तथा एअर कंट्रोल टॉवर का नवीकरण शामिल है। साथ ही, निकटवर्ती सड़कीय बुनियादी ढाँचे में सुधार कर स्थानीय यात्रियों को ‘अंतिम मील’ तक पहुँचाने की योजना है।
वित्तीय तौर पर इस कार्य को राज्य की सीधी बजट व्यवस्था और केंद्र के हवाई अड्डा विकास योजना (ADP) के तहत अनुदान से चलाया जाएगा। हालांकि, पिछले दशक में कई क्षेत्रीय हवाईअड्डे समय सीमा से अधिक समय तक चलें, इसलिए अधिकारियों से अपेक्षा है कि नई परामर्श टीम को बजट ओवररन, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे सामान्य अड़चनों से बचना होगा।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस परियोजना से कामगारों को अस्थायी रोजगार मिलेगा, जबकि दीर्घकालिक रूप में पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और हाउसिंग सेक्टर में प्रगति की उम्मीद की जा रही है। रायसल बाजार मंडी के प्रमुख ने कहा, “अगर हवाई कनेक्शन सुधर गया तो चाँट के लस्सी की मांग में भी इजाफा होगा।”
सिर्फ़ हवाई सुविधा का सुधरना ही पर्याप्त नहीं; प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय‑सीमा का कड़ाई से पालन और स्थानीय हितधारकों की भागीदारी आवश्यक है। यदि इन्हें ठीक से संभाला गया, तो रायसल का यह छोटे‑से‑हवाईअड्डा 2030 तक भारत‑नेपाल के व्यापार‑संधियों में प्रमुख कड़ी बन सकता है।
Published: May 6, 2026